Wednesday, February 25, 2026
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फुर्सत के क्षण…कालीचरन राजपूत

फुर्सत के क्षण…

 

अब घड़ी फुर्सत की आई ।

आप हमारे जाती भाई ।।

आओ मिलकर करें विचार ।

कुछ तो नया करें व्यवहार ।।

आज समय कितना सुन्दर है ।

खुलकर बोलो जो अन्दर है ।।

हम किसी का प्यार न पाते ।

घर जाएं तो मार भगाते ।।

मेरे सिर में पड़ गईं लीक ।

आज ढूंढना होगा ठीक ।।

हम दोनों पर खूब समय है ।

इस डाली पर कोई न भय है ।।

कोई जूं नहीं आज बचेगा ।

तेज धूप में खूब जंचेगा ।।

बीन बीन कर बाहर कर दूं ।

सारी पीड़ा आज ही हर दूं ।।

बाद में गूलर पर जायेंगे ।

गूलर पके_ पके खायेंगे ।।

ईश्वर है सबका रखवाला ।।

उसने ही हम सबको पाला ।।

 

✍️कवि -काली चरन राजपूत, कोटा।

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