फुर्सत के क्षण…
अब घड़ी फुर्सत की आई ।
आप हमारे जाती भाई ।।
आओ मिलकर करें विचार ।
कुछ तो नया करें व्यवहार ।।
आज समय कितना सुन्दर है ।
खुलकर बोलो जो अन्दर है ।।
हम किसी का प्यार न पाते ।
घर जाएं तो मार भगाते ।।
मेरे सिर में पड़ गईं लीक ।
आज ढूंढना होगा ठीक ।।
हम दोनों पर खूब समय है ।
इस डाली पर कोई न भय है ।।
कोई जूं नहीं आज बचेगा ।
तेज धूप में खूब जंचेगा ।।
बीन बीन कर बाहर कर दूं ।
सारी पीड़ा आज ही हर दूं ।।
बाद में गूलर पर जायेंगे ।
गूलर पके_ पके खायेंगे ।।
ईश्वर है सबका रखवाला ।।
उसने ही हम सबको पाला ।।
✍️कवि -काली चरन राजपूत, कोटा।
फुर्सत के क्षण…कालीचरन राजपूत





