महर्षि वेदव्यास…..
(व्यास पूर्णिमा विशेष)
महर्षि वेदव्यास का जन्म ईसा से 3000 वर्ष पहले हुआ था । उनका जन्म हुए, अब तक,पांच हजार पच्चीस, वर्ष हो चुके हैं । महर्षि वेद व्यास ने अपने जीवन में अनेक ग्रंथ, काव्य और महाकाव्य लिखे । उनके ग्रंथ इस प्रकार हैं _ _
महाभारत, गीता, 18 पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा और वेद ।
वेद के चार भाग किए गए हैं । वह चार भाग इस प्रकार हैं _ _
1. ऋग्वेद _ ऋग्वेद में मंत्र और ऋषियों, महर्षियों की काव्य, रिचा या मंत्र रूप वाणी है ।
2. सामवेद _ सामवेद में गायन विद्या का सृजन है ।
3. यजुर्वेद _ यजुर्वेद में धनुर्विद्या, शस्त्र विद्या आदि का ज्ञान भरा पड़ा है और
4.अथर्ववेद _ अथर्ववेद में चिकित्सा शास्त्र और जड़ी बूटियों का ज्ञान भंडार है ।
अब आओ महर्षि वेदव्यास जी के बारे में जानकारी प्राप्त करें_ _
आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा, है बहुत ही खास ।
इसकी महिमा बहुत है, जन्मे महर्षि व्यास ।।
जन्म हुआ था व्यास का, 3000 ईसा पूर्व ।
5025 वर्ष हो चुके, कृतियां रही अपूर्व ।।
सत्यवती माता रहीं, व्यास के ऐसे भाग ।
तटिनी तट पर भेंट भई, असर दिखाया राग़ ।।
पाराशर को भा गई, दासराज संतान । (सत्यवती)
दोनों के सहयोग से, खूब बढ़ा सम्मान ।।
प्रसव काल में मातश्री, बसी द्वीप पर जाय ।
जन्मा शिशु एक ही, सुत द्वैपायन कहाय ।।
श्याम वर्ण का सुत हुआ, कृष्ण रखा था नाम ।
मेधा में अग्रगण्य था, मंगल भए सब काम ।।
व्यास अर्थ फैलाव है, वेद नाम है ज्ञान ।
देकर धार्मिक ग्रंथ वे, बन गए व्यास महान ।।
ज्ञान, पूर्व में एक था, चार किए थे भेद ।
ज्ञान बांटकर चार में, बन गए चारों वेद ।।
रचना चारों वेद की, दिखा गई कुछ आस।
नाम दिया था तात ने, कृष्ण, हो गए व्यास ।।
व्यासजी ने क्या-क्या लिखा….
महाभारत गीता लिखी, अठारह लिखे पुरान।
भागवत लिखी व्यास ने, बांटा खूब ही ज्ञान ।।
वृहद ज्ञान था एक ही, चार हो गए भेद ।
बांटा भाग चार में, उपजे चारों वेद ।
भाग चार कर वेद के, पदवी पाई व्यास ।
उपनिषद, ब्रह्म सूत्र भी, लिखा गया मीमांस ।।
वेदों में क्या क्या है…
ऋषि वाणी ऋग्वेद में, सामवेद में गान ।
यजुर्वेद, धनुर्वेद है, अथर्व चिकित्सा जान ।।
द्वैपायन के जन्म से, मिला ज्ञान भंडार ।
जो कोई इसको पढ़े, हो जाए उद्धार ।।
हो जाए उद्धार….
हो जाए उद्धार ….
के. सी. राजपूत, कोटा ।
महर्षि वेदव्यास.. (व्यास पूर्णिमा विशेष)- कालीचरण राजपूत





