Wednesday, February 25, 2026
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महर्षि वेदव्यास.. (व्यास पूर्णिमा विशेष)- कालीचरण राजपूत

महर्षि वेदव्यास…..

(व्यास पूर्णिमा विशेष)

महर्षि वेदव्यास का जन्म ईसा से 3000 वर्ष पहले हुआ था । उनका जन्म हुए, अब तक,पांच हजार पच्चीस, वर्ष हो चुके हैं । महर्षि वेद व्यास ने अपने जीवन में अनेक ग्रंथ, काव्य और महाकाव्य लिखे । उनके ग्रंथ इस प्रकार हैं _ _

 

महाभारत, गीता, 18 पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा और वेद ।

 

वेद के चार भाग किए गए हैं । वह चार भाग इस प्रकार हैं _ _

 

1. ऋग्वेद _ ऋग्वेद में मंत्र और ऋषियों, महर्षियों की काव्य, रिचा या मंत्र रूप वाणी है ।

2. सामवेद _ सामवेद में गायन विद्या का सृजन है ।

3. यजुर्वेद _ यजुर्वेद में धनुर्विद्या, शस्त्र विद्या आदि का ज्ञान भरा पड़ा है और

4.अथर्ववेद _ अथर्ववेद में चिकित्सा शास्त्र और जड़ी बूटियों का ज्ञान भंडार है ।

 

अब आओ महर्षि वेदव्यास जी के बारे में जानकारी प्राप्त करें_ _

 

आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा, है बहुत ही खास ।

इसकी महिमा बहुत है, जन्मे महर्षि व्यास ।।

जन्म हुआ था व्यास का, 3000 ईसा पूर्व ।

5025 वर्ष हो चुके, कृतियां रही अपूर्व ।।

 

सत्यवती माता रहीं, व्यास के ऐसे भाग ।

तटिनी तट पर भेंट भई, असर दिखाया राग़ ।।

पाराशर को भा गई, दासराज संतान । (सत्यवती)

दोनों के सहयोग से, खूब बढ़ा सम्मान ।।

 

प्रसव काल में मातश्री, बसी द्वीप पर जाय ।

जन्मा शिशु एक ही, सुत द्वैपायन कहाय ।।

श्याम वर्ण का सुत हुआ, कृष्ण रखा था नाम ।

मेधा में अग्रगण्य था, मंगल भए सब काम ।।

 

व्यास अर्थ फैलाव है, वेद नाम है ज्ञान ।

देकर धार्मिक ग्रंथ वे, बन गए व्यास महान ।।

ज्ञान, पूर्व में एक था, चार किए थे भेद ।

ज्ञान बांटकर चार में, बन गए चारों वेद ।।

 

रचना चारों वेद की, दिखा गई कुछ आस।

नाम दिया था तात ने, कृष्ण, हो गए व्यास ।।

 

व्यासजी ने क्या-क्या लिखा….

 

महाभारत गीता लिखी, अठारह लिखे पुरान।

भागवत लिखी व्यास ने, बांटा खूब ही ज्ञान ।।

वृहद ज्ञान था एक ही, चार हो गए भेद ।

बांटा भाग चार में, उपजे चारों वेद ।

 

भाग चार कर वेद के, पदवी पाई व्यास ।

उपनिषद, ब्रह्म सूत्र भी, लिखा गया मीमांस ।।

 

वेदों में क्या क्या है…

 

ऋषि वाणी ऋग्वेद में, सामवेद में गान ।

यजुर्वेद, धनुर्वेद है, अथर्व चिकित्सा जान ।।

 

द्वैपायन के जन्म से, मिला ज्ञान भंडार ।

जो कोई इसको पढ़े, हो जाए उद्धार ।।

हो जाए उद्धार….

हो जाए उद्धार ….

के. सी. राजपूत, कोटा ।

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