Wednesday, February 25, 2026
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मनुष्य के जीवन में सर्वोच्च स्थान गुरु का है (कुंडलियाँ) -राम शर्मा ‘कापरेन’

मनुष्य के जीवन में सर्वोच्च स्थान गुरु का है, यह सर्वविदित है।

आइए गुरु की महिमा का गुणगान करते हैं…

कुंडलियाँ

(1)

 

देकर हमको ज्ञान धन,जाते वे फिर भूल।

पीढ़ी खर्चे ब्याज को, गुरु हमको दे मूल।

गुरु हमको दे मूल, रहे जीवन भर दाता।

जिसमें है अभिमान, पात्र वो कब भर पाता।

रहता हूँ नत शीष , ज्ञान मैं गुरु का लेकर।

उतरेगा ऋण ‘राम’ , नहीं तन-मन-धन देकर।

(2)

कुंडलिया छंद

 

जब घिर कष्टों से गया, संबल गुरु हैं आप।

शीतल-निर्मल चंद्रिका,है गुरुवर का ताप।

है गुरुवर का ताप, बढ़ाए कदम हमारे।

गुरु के वचन मल्हार, सदा ही तू मन गा रे।

बालक शर्मा राम,जगाओ खुद को अब फिर।

शाश्वत गुरु की राह,गहे क्यों जाता जब घिर।

 

राम शर्मा ‘कापरेन ‘

Rsk

कोटा

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