ग़ज़ल
शकूर अनवर
जब यौवन पर आई नद्दी।
फिर कैसी इठलाई नद्दी।।
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कितनी निर्मल कितनी सुन्दर।
जैसे आज नहाई नद्दी।।
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मैने समझा तुम आये हो।
जब सपने में आई नद्दी।।
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जब जब दिल में पीड़ा उट्ठी।
ऑंखों में भर आई नद्दी।।
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ये तेरी ममता का आँचल।
ये तेरी गहराई नद्दी।।
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ये तेरी लहरों की सरगम।
ये तेरी शहनाई नद्दी।।
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तृष्णाओं के अभ्यासी थे।
क्यूँ रस्ते में आई नद्दी।।
दिल की कश्ती डूबी इसमें।
फिर भी दिल को भाई नद्दी।।
मैं तेरा शैदाई* “अनवर”।
तू कितनी हरजाई* नद्दी।।
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शब्दार्थ:-
शैदाई*प्रेम में डूबा हुआ
हरजाई*निष्ठुर
शकूर अनवर
9460851271
ग़ज़ल -शकूर अनवर





