Thursday, September 3, 2026
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ग़ज़ल -शकूर अनवर 

ग़ज़ल

शकूर अनवर

जब यौवन पर आई नद्दी।

फिर कैसी इठलाई नद्दी।।

*

कितनी निर्मल कितनी सुन्दर।

जैसे आज नहाई नद्दी।।

*

मैने समझा तुम आये हो।

जब सपने में आई नद्दी।।

*

जब जब दिल में पीड़ा उट्ठी।

ऑंखों में भर आई नद्दी।।

*

ये तेरी ममता का आँचल।

ये तेरी गहराई नद्दी।।

*

ये तेरी लहरों की सरगम।

ये तेरी शहनाई नद्दी।।

*

तृष्णाओं के अभ्यासी थे।

क्यूँ रस्ते में आई नद्दी।।

 

दिल की कश्ती डूबी इसमें।

फिर भी दिल को भाई नद्दी।।

 

मैं तेरा शैदाई* “अनवर”।

तू कितनी हरजाई* नद्दी।।

*

शब्दार्थ:-

शैदाई*प्रेम में डूबा हुआ

हरजाई*निष्ठुर

शकूर अनवर

9460851271

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