Wednesday, February 25, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

श्रीम‌द्भगवद्गीता- कालीचरण राजपूत

गीता श्लोक 16/11..

असुरों के लिए भोग और संग्रह मुख्य है …

भगवान कहते हैं कि आसुरी संपदा वाले_ वे मृत्यु पर्यंत रहने वाली अपार चिताओं का आश्रय लेने वाले, पदार्थ का संग्रह और उनका भोग करने में भी ही लगे रहने वाले, कुछ और जो कुछ है इतना ही है, ऐसा निश्चय करने वाले होते हैं ।

असुर लोगों में ऐसी चिंताएं रहती हैं, जिनका कोई नाप तोल नहीं । जब तक प्रलय नहीं, तब तक उनकी चिंताएं मिटती नहीं । ऐसी प्रलय तक रहने वाली चिताओं का फल भी प्रलय ही प्रलय अर्थात बार-बार मरना जीना ही होता है ।

जिनको परमार्थिक चिंता होती है, वह श्रेष्ठ हैं । परंतु आसुरी संपदा वालों को ऐसी चिंता नहीं होती । वह तो इससे विपरीत सांसारिक चिताओं के आश्रित रहते हैं । मनुष्य व्यर्थ में ही चिंता करता है । निर्वाह तो होता रहेगा । धन शेष रहते ही मनुष्य मरता है । अनाज शेष रहते ही मनुष्य मरता है । धन तो पड़ा रहता है और काम में नहीं आता । परंतु ऐसे पुरुष जो अपने पास कुछ भी संग्रह नहीं करते, ऐसे संतों का भी प्रारब्ध के अनुसार आवश्यकता से अधिक वस्तुएं मिल जाती हैं तथा जीवन निर्वाह चीजों के अधीन नहीं । इस बात को आसुरी प्रकृति वाले भोगी नहीं समझते ।

गीता श्लोक 16/12…

आसुर पुरुष, धन संचय में लगे रहते हैं …..

भगवान कहते हैं कि वह असुर लोग आशा की सैकड़ो फांसियों से बंधे हुए मनुष्य, काम, क्रोध के पारायण होकर पदार्थ का भोग करने के लिए अन्याय पूर्वक धन संचय करने की चेष्टा करते रहते हैं ।

आसुरी प्रकृति वाले मनुष्य आशा रूपी सैकड़ो पासों में बंधे रहते हैं । आशा की पासों में बंधे हुए मनुष्यों के पास लाखों करोड़ों रुपए हो जाए, फिर भी उनकी मांग बनी रहती है । ऐसे व्यक्तियों की सांसारिक इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती । यदि पूरी हो भी जाएं तो भी वह संतुष्ट नहीं होते । आसुरी प्रकृति वाले पुरुषों का परम स्थान काम और क्रोध ही होते हैं । काम, क्रोध के पारायण मनुष्यों का निश्चय रहता है कि कामना के बिना मनुष्य जड़ हो जाता है । क्रोध के बिना उसका तेज नहीं रहता । उनके जीवन में काम और क्रोध तो सारे तत्व ही हैं ।

गीता श्लोक 16/13…

आसुर पुरुषों की इच्छाएं….

असुर लोग कहते हैं कि इतनी वस्तुएं तो हमने इकट्ठी कर ली और अब इस मनोरथ को प्राप्त कर लेंगे । इतना धन तो हमारे पास है ही, इतना धन फिर भी हो जाएगा ।

आसुरी प्रकृति वाले व्यक्ति लोग के प्राण होकर मनोरथ करते रहते हैं कि आज तक हमें कितनी वस्तुएं प्राप्त कर ली हैं और आगे इतनी प्राप्त कर लेंगे । वे रोजाना इसी उधेड़बुन में लगे रहते हैं कि कौन सा माल कहां से और कैसे प्राप्त करें ?

उनको जैसे-जैसे लोग बढ़ता है वैसे-वैसे ही उनके मनोरथ अर्थातk इच्छाएं भी बढ़ती जाती हैं । इस विषय में उनका चिंतन बढ़ जाता है । जब उनकी दृष्टि अपने शरीर तथा परिवार पर जाती है, तब वह उस विषय में मनोरथ करने लगते हैं । मनोरथ करते-करते उनको यह याद नहीं रहती कि हम बूढ़े हो जाएंगे तो इस सामग्री का क्या करेंगे ? अंत में हमारी सत्ता का मालिक कौन होगा?

गीता श्लोक 16/14…

आसुरी प्रकरण वाले तो स्वयं को ईश्वर ही मानने लगते हैं….

भगवान कहते हैं कि वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओं को भी हम मार डालेंगे। हम स्वयं ईश्वर हैं, सर्व समर्थ हैं । हम भोग भोगने वाले हैं । हम सिद्ध हैं । हम बड़े बलवान और सुखी भी हैं ।

आसुरी प्रकृति वाले पुरुष क्रोध में आकर कहते हैं कि अमुक हमारे विरुद्ध कार्य करता था, इसलिए हमने मार दिया । अन्य जो भी हमारे विपरीत चलते हैं, हमारा अनिष्ट सोचते हैं, उन्हें भी हम मार डालेंगे । हम धन, बल से समर्थ हैं । हमारा कोई क्या बिगाड़ सकता है । हम भोग भोगने वाले हैं । हम सब तरह से सिद्ध हैं । जो जो लोग भजन, पूजा, यज्ञ, जप, व्रत करते हैं, वह तो बहकावे में आए हुए हैं । हमारे पास तो अणिमा, गरिमा सभी सिद्धियां हैं, हम सर्व समर्थ हैं । यदि किसी स्थान पर पासा पलट गया और हार गए तो, किसी को भी नहीं बताते । उन्हें अपनी हार की बात याद रहती है और उसका बदला लेने के लिए छद्म चाल चलते रहते हैं । ऐसे व्यक्तियों में अन्य लोगों के प्रति हमेशा जलन रहती है ।

गीता 16/15….

आसुरी पुरुष दान यज्ञ आदि की शेखी बघारते हैं …..

आसुरी प्रकृति वाले लोग कहते हैं कि हम धनवान हैं । बहुत से मनुष्य हमारे पास हैं । हमारे समान दूसरा कौन है । हम सब यज्ञ करेंगे, दान देंगे और मौज करेंगे । इस तरह हुए अज्ञान से मोहित रहते हैं ।

असुर लोग उनके अभिमान के कारण इस प्रकार के मनोरथ करते हैं । हमारे पास बहुत सारा धन, सोना, चांदी, मकान संपत्ति है । धन और बल के आधार पर हम सब कुछ कर सकते हैं । वह दूसरों से पूछते हैं कि क्या आपने अपने सामान कोई अन्य आदमी देखा है । वह कहते हैं कि हम बहुत बड़ी यज्ञ करेंगे । बहुत से दान देंगे । बड़ी मौज करेंगे । बड़ा भोज करेंगे । हम तो ऐसे यज्ञ और दान करेंगे, जो आज तक किसी ने नहीं किए हों । इस प्रकार अभिमांन को लेकर मनोरथ करने वाले असुर लोग केवल करेंगे, करेंगे ऐसा कहते फिरते हैं । वास्तव में करते धरते कुछ नहीं । यदि करेंगे तो नाम मात्र के लिए करेंगे । यह सब व्रत उनकी मूढ़ता के कारण होती है ।

गीता श्लोक 16/16…

भोगों में आशक्ति वाले पुरुष नर्कों में जाते हैं…

भगवान कहते हैं की कामनाओं के कारण तरह-तरह से भ्रमित चित्त वाले मोह जाल में अच्छी तरह से फंसे हुए तथा पदार्थ और भोगों में अत्यंत आवश्यकता रखने वाले मनुष्य भयंकर नर्कों में गिरते हैं ।

भगवान कहते हैं कि असुर मनुष्यों का एक निश्चय न होने से उनके मन में अनेक तरह की इच्छाएं होती है । इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनेक तरह के उपाय करते हैं और उपाय करने के लिए अनेक तरह से चिंतन करते हैं । उनका मन किसी एक बात पर स्थिर नहीं रहता । वरन भटकता ही रहता है । मूर्खतापूर्ण उद्देश्य होने से वे मोह जाल में फंसे रहते हैं । काम, क्रोध, अभिमान आदि सब पाले रहते हैं। उनमें फंसे रहते हैं । ऐसे लोगों को काम, क्रोध के साथ पाप भी सताता रहता है । इसलिए वह निश्चय नहीं कर पाते। जाना होता है कहीं, चले जाते हैं कहीं और जगह । मनोरथ सिद्ध न होने पर उन्हें दुख भी होता है ।

गीता श्लोक 16/17…

आसुर लोग दिखावे के लिए यज्ञ करते हैं ……

भगवान कहते हैं कि अपने को सबसे अधिक पूज्य मानने वाले, अकड़ रखने वाले तथा धन और मान के मद में चूर रहने वाले, वह मनुष्य दंभ अर्थात घमंड से अविधिपूर्वक नाम मात्र के यज्ञों से यजन करते हैं ।

आसुरी संपदा वाले लोग धन, मान, बड़ाई, आदर आदि की दृष्टि से अपने आप को बड़ा मानते हैं । पूज्य समझते हैं कि हमारे समान कोई नहीं है । अतः हमारा पूजन होना चाहिए । आधार होना चाहिए । वर्ण, आश्रम, विद्या, बुद्धि, पद, अधिकार, योग्यता आदि में वे अपने को सब तरह से श्रेष्ठ बताते हैं । इससे वह सोचते हैं कि लोगों को उनके ही अनुसार चलना चाहिए ।

वे लोग दिखाने के लिए नाम मात्र के यज्ञ करते हैं, जो कुछ करते हैं केवल दिखाने के लिए करते हैं । भाव भी उनका यह रहता है कि उनके इस कार्य का अन्य लोगों पर अधिक से अधिक प्रभाव पड़े । लोग हमारा नाम जान जाए और हम प्रसिद्ध हो जाएं ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles