के डी अब्बासी
कोटा, 27 जून। जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने शुक्रवार को एमबीएस अस्पताल का सघन निरीक्षण किया। उनके साथ मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना और एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निष्पादन को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इसका निस्तारण निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ब्लड बैंक की स्थिति की समीक्षा करते हुए ब्लड ग्रुपवार यूनिट्स की पर्याप्त उपलब्धता की अनिवार्यता पर बल दिया। अस्पताल परिसर में पाई गई गंदगी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने नियमित एवं सतत सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि सभी ड्यूटी डॉक्टर एप्रन में हों तथा नर्सिंग स्टाफ के नाम बैज उनकी यूनिफॉर्म पर प्रदर्शित हों ताकि जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके और मरीजों को सही व्यक्ति तक पहुंचने में असुविधा न हो। कलेक्टर ने कहा कि अस्पताल परिसर में प्रमुख योजनाओं की जानकारी, ड्यूटी स्टाफ की डिटेल्स, ओपीडी/आईपीडी समय, विभागीय मैप आदि सूचना बोर्डों के माध्यम से प्रदर्शित किए जाएं ताकि मरीजों एवं तीमारदारों को इधर-उधर भटकना न पड़े। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, SOP की अनुपालना, जांच व रिपोर्ट वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा करते हुए मरीजों को सुगमता से गुणवत्तापूर्ण सेवा देने के निर्देश दिए।
रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल पर जताई चिंता, किया कार्य पर लौटने का आग्रह
कलेक्टर डॉ. समारिया ने रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल और उससे प्रभावित हो रही चिकित्सा सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वैकल्पिक व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही रेजिडेंट्स से संवेदनशील अपील की कि जनहित सर्वोपरि है और उन्हें शीघ्र कार्य पर लौटना चाहिए।
विभिन्न चिकित्सा इकाइयों का अवलोकन, सेवाओं की समीक्षा
कलेक्टर ने इमरजेंसी, ओपीडी, आईपीडी, पर्ची काउंटर, सर्जिकल वार्ड, सामान्य और डीलक्स वार्ड सहित सभी प्रमुख इकाइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीज भार, मौसमी रोगों की प्रवृत्ति और उपचार पद्धतियों की जानकारी ली और डॉक्टरों से सक्रिय समन्वय में कार्य करने को कहा।
भीड़ प्रबंधन और सूचना संप्रेषण पर निर्देश
पर्ची वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि भीड़ की स्थिति में प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ऊपरी मंजिलों पर स्थित काउंटरों की जानकारी मरीजों को स्पष्ट रूप से मिले और आईईसी सामग्री के माध्यम से योजनाओं व सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
बेड क्षमता और स्टाफ की स्वीकृति हेतु प्रयास के निर्देश
अधीक्षक द्वारा अवगत कराया गया कि 750 स्वीकृत बेड के स्थान पर वर्तमान में 1025 बेड पर सेवाएं दी जा रही हैं। कलेक्टर ने कहा कि रोगी भार के अनुसार स्टाफ की स्वीकृति हेतु राज्य स्तर पर बात की जाएगी ताकि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा सुनिश्चित हो सके।
उपकरणों की एएमसी और तकनीकी रखरखाव अनिवार्य
कलेक्टर ने एयर कंडीशनिंग, तापमान नियंत्रण, चिकित्सा उपकरणों एवं लाइफ सेविंग मशीनों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि एएमसी नियमित हो और कोई भी यंत्र खराब न रहे, इसके लिए तकनीकी मॉनिटरिंग सिस्टम सक्रिय किया जाए।
*आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना की समीक्षा*
उन्होंने आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत इलाज प्राप्त कर रहे मरीजों की संख्या और प्रक्रिया की समीक्षा की। साथ ही नर्सिंग स्टाफ, ऑपरेटर, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की जानकारी लेते हुए मरीजों से फीडबैक लेकर सेवाओं में सतत सुधार के निर्देश दिए।
*मेडिकल यूनिट्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा*
कलेक्टर ने जनरल मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, न्यूरोलॉजी आदि विभागों का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध संसाधनों और सेवाओं की स्थिति जानी। नई और पुरानी आईपीडी को जोड़ने वाले लिंक कॉरिडोर निर्माण हेतु पीडब्ल्यूडी से शीघ्र समन्वय कर निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
*मानसून में जलभराव की समस्या पर सख्त निर्देश*
मानसून में अस्पताल परिसर के कुछ हिस्सों में जलभराव की समस्या पर कलेक्टर ने नगर निगम एवं संबंधित विभागों को स्थायी समाधान हेतु तत्काल कार्यवाही करने को कहा।
*ठेका कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं*
निरीक्षण के दौरान ठेका कर्मचारियों ने कलेक्टर को अपनी समस्याएं बताईं, जिस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी समस्याओं का समाधान नियमानुसार और समयबद्ध ढंग से किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान आईएएस प्रशिक्षु अधिकारी अराधना चौहान भी मौजूद रहीं।
कलेक्टर ने अंत में कहा कि एमबीएस अस्पताल प्रदेश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में से एक है, अतः यहां की सभी व्यवस्थाएं मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार संचालित हों, सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा हर मरीज को सम्मान, सुरक्षा और समर्पण के साथ चिकित्सा सेवा मिले, यही प्रशासन की प्राथमिकता है।






