कोटा,10 मई । पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी कोटा में परम पूज्य आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य गुरूदेव निर्यापक तीर्थचक्रवती मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं प्रेरणा से आठ दिवसीय पुण्योदय सम्यग्ज्ञान शिक्षण शिविर का सातवे दिवस पर शिविर संयोजिका अर्चना रानी जैन सर्राफ ने बताया कि नसियां जी में आज की प्रातः कालीन प्रवचन में आज परम पूज्य आध्यात्मयोगी आचार्य श्री आर्जव सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री विभोरसागर जी महाराज ने बताया की संसारी जीव जिस पर्याय में रहता है उसको वह पर्याय रुचिकर लगने लगती है, वह उस पर्याय से निकलना नहीं चाहता और यही राग संसारी जीव को उसके संसार का कारण बना देता है, इसीलिए पर्याय से प्रेम न करके द्रव्यदृष्टि रखनी चाहिए ।।
अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि प्रवचनों के पश्चात सांगानेर से पधारे पंडित श्री पारस जैन शास्त्री ने तत्त्वार्थ सूत्र जी के स्वाध्याय व प्रश्नोत्तरी रत्नमालिका की कक्षा में सभी को बताया आज तत्त्वार्थ सूत्र जी की कक्षा में पंडित पारस जैन शास्त्री ने बताया कि उपकारी के उपकार को नहीं भूलना चाहिए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के एवं पूज्य गुरुदेव सुधासागर जी महाराज के अनंत उपकार हैं हम पर जिनको चुका पाना में संभव नहीं ।
संयोजक धर्मचंद जैन धनोप्या ने बताया कि जहां देव शास्त्र गुरु धर्म, अध्यात्म आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम से सांगानेर संस्थान से आए हुए विद्वानों के द्वारा निम्न अष्टदिवसीय शिविर के उपरांत दिनाक 10-05-2025 शनिवार सायंकाल 7:30 से लगभग 500 से अधिक शिविरार्थियों ने इष्टोपदेश ग्रंथ जी बालबोध भाग (1 छहढाला (पूर्वार्ध), छहढाला (उत्तरार्द्ध), बालबोध भाग ( 2) दो, ,आदि ग्रंथों की परीक्षाएं ली गई
निदेशक हुकम जैन काका ने बताया दिनाक 11-05-2025 रवि वार सुबह प्रातः 7:30 से जिनवाणी प्रभावना यात्रा एवं 64 ऋद्धि महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 108 मंडलों के द्वारा ऋद्धिधारी महामुनिराजों की संगीतमय महाअर्चना की जाएगी।
सुमित सेंकी ने बताया रविवार सायंकालीन 7:30 से शिविर का भव्य समापन समारोह का आयोजन किया गया है मुख्य अतिथि श्रीमान राजेश जी सोनल जी ओमांशी जी नवांशी जैन सेठिया आनंद डायग्नोस्टिक तलवंडी कोटा होंगे जिसमें शिविर में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले शिवरार्थी को एवं प्रथम,द्वितीय, तृतीय, एवं सांत्वना स्थान प्राप्त करने वाले शिविरार्थीयों को पुरस्कृत किया जाएगा एवं दादाबाड़ी पाठशाला के बच्चों के द्वारा एक लघु नाटिका “संपत्ति नहीं संस्कार दीजिए “प्रस्तुत की जाएगी ।






