अरे तुम सुधर जाओ मक्कार…
रे तुम सुधर जाओ मक्कार, कारण बिन मत खून बहाओ ।
तुम भाई चारा तो निभाओ,सब मिल बांट कर खाओ ।।
घाटी ने पर्यटन खूब बढ़ायो, कोई जन दूर देश से आयो ।।
कोई भारत देश को वासी, और कोई अन्य देश ते आयो ।।
चल रही मार काट बयार, रे तुम सुधर जाओ मक्कार,
बिन कारण मत खून वहाओ ..
उन्होंने निर्मम हत्या कर दीनी, कितनी जिंदगियां छीनी ।
इन्होंने लूट लिया घर द्वार, बहु लोग भए हैं शिकार ।।
दुष्टों ने पुरुषों बच्चों को मारा, यह पाक बना हत्यारा ।।
समझाने का कोई नहीं है सार, वे करते रहे वार-पर वार ।।
रे तुम सुधर जाओ गद्दार, बिन कारण मत खून बहाओ ….
ना देखें कौन कहां से आयो, केवल हत्या को धर्म बनायो ।
वे करते हैं हथियारों से प्यार, इनके हैं उनके ही जैसे है यार ।।
कोई तो काहू को बेटा है, बिन सांस जमीं पर लेटा है ।
उनकी यह हरकत है कायराना, सब पहने आतंकी बाना ।।
रे तुम सुधर जाओ गद्दार, बिन कारण मत खून बहाओ …
पाक की टीआरफ संस्था भारी, जान लेने की करी तैयारी ।
कितने गिर गए ये हैवान, इनका तन मन है शैतान ।
हरकत में आ गई है सरकार, नहीं बच पाओगे मक्कार ।।
रे तुम सुधर जाओ गद्दार, बिन कारण मत खून बहाओ..
के. सी. राजपूत, कोटा।





