Saturday, April 18, 2026
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भारतीय आयुर्वेद ..- कालीचरण राजपूत

भारतीय आयुर्वेद ….

 

आयुर्वेद युगों से रहा, औषधि विषद विज्ञान ।

सहज से नहीं जाता है, उधर किसी का ध्यान ।।

हमारे पूर्वज ऋषि मुनि, आयुर्वेद के ज्ञाता ।

आज भी वैद्य विशारद, आयुर्वेद के ध्याता ।।

एलोपैथी ज्ञान न था, रहा आयुर्वेद सिरमौर ।

तब आयुर्विज्ञान ही था, कोई नहीं था और ।।

धनवंतरि ऋषि अग्रगन्य, आयुर्विज्ञान बनाया ।

जड़ी बूटी की औषधि से, मानो अमृत पाया ।।

जय हो ऐसे ऋषि मुनि की, खोजीं बहुत दवाई ।

आदर वाली सूची में, ऋषि को ऊंचा रखो भाई ।।

इसी औषधि से देखो, कर्ण स्वस्थ हो पाया ।

वैसे तो वह सूर्य पुत्र, था मां कुंती का जाया ।।

यही तो ऋषि धनवंतरि हैं, आयुर्वेद के ज्ञाता ।

आजकल का हर वैद्य, हर रोज उन्हें ही ध्याता ।

के. सी. राजपूत, कोटा।

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