भारतीय आयुर्वेद ….
आयुर्वेद युगों से रहा, औषधि विषद विज्ञान ।
सहज से नहीं जाता है, उधर किसी का ध्यान ।।
हमारे पूर्वज ऋषि मुनि, आयुर्वेद के ज्ञाता ।
आज भी वैद्य विशारद, आयुर्वेद के ध्याता ।।
एलोपैथी ज्ञान न था, रहा आयुर्वेद सिरमौर ।
तब आयुर्विज्ञान ही था, कोई नहीं था और ।।
धनवंतरि ऋषि अग्रगन्य, आयुर्विज्ञान बनाया ।
जड़ी बूटी की औषधि से, मानो अमृत पाया ।।
जय हो ऐसे ऋषि मुनि की, खोजीं बहुत दवाई ।
आदर वाली सूची में, ऋषि को ऊंचा रखो भाई ।।
इसी औषधि से देखो, कर्ण स्वस्थ हो पाया ।
वैसे तो वह सूर्य पुत्र, था मां कुंती का जाया ।।
यही तो ऋषि धनवंतरि हैं, आयुर्वेद के ज्ञाता ।
आजकल का हर वैद्य, हर रोज उन्हें ही ध्याता ।
के. सी. राजपूत, कोटा।
भारतीय आयुर्वेद ..- कालीचरण राजपूत






