पाँच राजस्थानी ( हाड़ोती ) पुस्तकों का विमोचन
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रविवार को साहित्यकार दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’ की पाँच राजस्थानी ( हाड़ोती ) भाषा की पुस्तकों सरद सोवणी रात,गांवां की गुलमो’र,छूट गयो बैराग, घणी दुख्यारी नार,और वेदव्यास की मे’र का विमोचन शिवपुरा,कोटा में किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही,मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार व गीतकार मुकुट मणिराज,विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.अनिता वर्मा और वरिष्ठ राज.साहित्यकार जगदीश भारती थे। विमोचित कृतियों पर प्रकाश डालने वाले मुख्य वक्ता वरिष्ठ कथाकार और समीक्षक विजय जोशी थे।कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार जोधराज परिहार ( मधुकर ) ने किया। सरस्वती वंदना वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमान रूप जी रूप ने की। जगदीश भारती ने ‘छूट गयो बैराग कृति की बहुत सुन्दर और प्रशंसनीय समीक्षा प्रस्तुत कर सबका मन जीत लिया। साहित्यकार योगेश यथार्थ ने ‘गांवां की गुलमो’र’ कृति पर बोल कर कृति और कृतिकार दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’ का मान बढ़ाया। ‘सरद सोवणी रात’ कृति पर श्रीमान देवकी दर्पण और महाभारत गाथा पर आधारित महाकाव्य ‘वेदव्यास की मे’र’ पर
सत्येन्द्र वर्मा ने अपने विचार बहुत बेहतरीन ढंग से रखे। श्रीमान विजय जोशी ने मुख्य वक्ता की भूमिका निभाते हुए पाँचों कृतियों पर बोल कर सबको भाव विभोर कर दिया। विशिष्ठ अतिथि डाॅ.अनिता वर्मा,मुख्य अतिथि मुकुट मणिराज और अध्यक्षता कर रहे जितेन्द्र निर्मोही साहब ने अपने उत्कृष्ट उद्बोधन द्वारा उपस्थित जनों का मार्ग दर्शन किया। नवीन गोतम ने कृतिकार का परिचय पेश किया। भवानीशंकर वैष्णव और मनमोहन वैष्णव ने सभी का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया। कोटा,बूँदी,बारां व झालावाड़ के साहित्यकारों,गणमान्य नागरिकों और परिवार जनों ने कृतिकार का भावभीना स्वागत और सम्मान कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।






