कुछ दोहे,,,,,,,,,
शकूर अनवर
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पतझड़ का मौसम नहीं,उग आये क्यूँ शूल।
उपवन सूना क्यूँ हुआ,सूख गये क्यूँ फूल।।
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तूफ़ानों को देखकर, हिम्मत को मत हार।
तेरी मंज़िल सामने, दरिया के उस पार।।
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मन के अन्दर द्वंद्व है,मचा हुआ कोहराम*।
ख़ुद से ही लड़ना पड़े,जीवन का संग्राम।।
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शकूर अनवर
कोहराम*वावेला,आफ़त
9460851271





