Sunday, August 23, 2026
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एक दीप ईमान का- संत कवि मदन दास जी महाराज

रहे न नाम निशान धरां पर अंधकार आज्ञा का

अगर जला ले मन मंदिर में, एक दीप ईमान का

परंपराओं के जंगल में, भूल गए अपनी मंजिल

योग के अंधे चौराहों पर, बिखर गए मन के शत दल

भाग्य सितारा चमक उठेगा, नवयुग के निर्माण का ॥अगर॥

धर्म का कुआं खोदते फिरते, चमत्कार के अभ्यासी

अंतर मन का मैल छुड़ाने, जाते हैं काबा काशी

धर्म कर्म से टूटा मानव, लेता शरण अंधेरे की

दुर्बल आत्मा परस न पाती, स्वर्णिम किरण सवेरे की

नई चेतना से भर आए कुठिंत मन इंसान का॥अगर॥

जिस दिन फूटेगा भीतर से, एक गीत सच्चाई का

बन जाएगा कीर्तिमान, नव मानव की ऊंचाई का

कठिन प्रश्न हल हो जाएगा, भूंख प्यास बीमारी का

बीज न बोएगा जब कोई,छल प्रपंच मक्कारी का

हो जाए चिर मिलन, आलोकिक ज्ञान और विज्ञान का॥अगर॥

दीप ज्यॊति पर्व हर साल, मनाते बीत गई जीवन घड़ियां

नम पहाड़ की फ़टी ना छाती, लाखों छोडी फुलझड़ियां

जगमग जगमग पथ प्रशस्त हो, मानव के निर्माण का॥अगर॥

आत्मदीप की एक किरण ने,जब-जब तुम को ललकारा

हुआ सत्य अद्भुत धरा पर, बही ज्ञान गंगा धारा

सरल नहीं है तिमिर ठेलना,केवल मीठी बातॊं से

सारी रात जुझना पड़ता, तम के झंझा बातों से

गौरी शंकर की चोंटी हो, चाहे हो खदक रषाई

निर्भय होकर झांका करती, आत्म ज्योति की परछाई

जीवन यज्ञ सफल हो जाए आत्म त्याग बलिदान का॥अगर॥

संत कवि मदन दास जी महाराज

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