अखिल नामा
बारां/शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में कूनो नेशनल पार्क से निकलकर आए चीता P-3 के आगमन का जोरदार स्वागत किया है। समिति ने इस घटनाक्रम को बारां जिले और संपूर्ण हाड़ौती क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और उत्साहजनक क्षण बताया है।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक
और अधिवक्ता प्रशांत पाटनी और सदस्यों ने एक ज्ञापन के माध्यम से राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि” शेरगढ़ अभयारण्य का कूनो नेशनल पार्क के साथ सीधा प्राकृतिक कॉरिडोर जुड़ा हुआ है। चीता के यहाँ पहुँचने से यह सिद्ध हो गया है कि यह मार्ग वन्यजीवों के लिए एक सक्रिय और महत्वपूर्ण ‘इकोलॉजिकल कॉरिडोर’ है। यह क्षेत्र मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को भी जोड़ता है, जिससे यह भविष्य में चीता और अन्य वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित पर्यावास बन सकता है।”
ज्ञापन में समिति ने चीते के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझावों से भी अवगत करवाया है।
समिति सदस्य शशांक नंदवाना और इंटैक सदस्य हरिओम अग्रवाल ने सरकार से विनम्र अनुरोध किया है “कि चीता P-3 को शेरगढ़ अभयारण्य से वापस कूनो भेजने के लिए ट्रैंक्विलाइज़ (बेहोश) करने जैसी अप्राकृतिक प्रक्रियाओं का उपयोग न किया जाए। चीता स्वयं यहाँ आया है, जो दर्शाता है कि उसे यहाँ का वातावरण अनुकूल लगा है।”
भारतीय सांस्कृतिक निधि वराह नगरी बारां अध्याय की एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु साबू ने कहा कि”शेरगढ़ अभयारण्य में चीतों के लिए आवश्यक विस्तृत घास के मैदान, शाहबाद-रामगढ़-किशनगंज के सघन वन और पार्वती नदी की कंदराएं (Ravines) उपलब्ध हैं, जो चीतों के शिकार और रहने के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।”
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक, इंटेक सदस्य बृजेश विजयवर्गीय और डॉ मुकेश मीणा ने कहा कि “यदि शेरगढ़ में चीते का स्थायी प्रवास सुनिश्चित किया जाता है, तो इससे बारां जिले में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।”
समिति सदस्य मुकेश सोनी और भानु गुप्ता और क्षेत्र के समस्त वन्यजीव प्रेमियों ने सामूहिक स्वर में मांग की है कि “प्रशासन को चीते की सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए, न कि उसे यहाँ से निकालने की कोशिश। शेरगढ़ में चीते का रहना न केवल जैव-विविधता के लिए शुभ है, बल्कि यह हाड़ौती के प्राकृतिक गौरव को भी पुनर्जीवित करेगा।”





