Sunday, April 19, 2026
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ग़ज़ल-शकूर अनवर

ग़ज़ल

शकूर अनवर

प्रेम का हमको ज्ञान नहीं है।

ये मुश्किल आसान नहीं है।।

*

जिस घर में मेहमान नहीं है।

उसके घर भगवान नहीं है।।

*

तुम क्या हो ये साबित करदो।

क्या ख़ुद से पहचान नहीं है।।

*

सूरज को सूरज ही समझो।

इसमें कुछ अपमान नहीं है।।

*

मरघट का सन्नाटा क्यूँ है।

ये दुनिया शमशान नहीं है।।

*

वो शब्दों के तीर न छोड़े।

ऐसा भी नादान नहीं है।।

*

थम सी गई लहरों की हलचल।

दरिया में तूफ़ान नहीं है।।

*

मॅंहगाई के दौर में “अनवर”।

मरना भी आसान नहीं है।।

*

✍शकूर अनवर

📞946085127

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