*सभी को अपना बना लो ये अहतेमाम करो ।
खूलूसे दिल से हर एक शख्स से कलाम करो ।।
किसी का खून बहाने से क्या मिलेगा तुम्हें ।
वफा की शम्में जलाओ यह इंतिजाम करो ।।
पयाम लेके कोई सरहदों से आया है ।
हर एक कतरा लहू का वतन के नाम करो ।।
तुम्हारा फर्ज तो पैगाम था अहिंसा का ।
यह तुम से किसने कहा था कि कत्ले आम करो ।।
कहा था मुझसे मेरी मां ने एक दिन वाजिद ।
जो मिट सके ना जमाने में तुम वो काम करो* ।।
-वाजिद अली वाजिद





