युवा भारत के सपनों को सलाम: PM मोदी के नेतृत्व में कौशल से विश्व पटल तक
‘विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारतीय प्रतिभाओं का शानदार प्रदर्शन बताता है कि कौशल, तकनीक और आत्मविश्वास से युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई ऊंचाइयां छू सकते हैं’
✍️ डॉ. नयन प्रकाश गांधी
पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
भारत की आबादी वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुमान के अनुसार लगभग 146.39 करोड़ तक पहुंच गई। इनमें 10 से 24 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 38.2 करोड़ युवा और किशोर शामिल हैं। यह विशाल युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक है। लेकिन जनसंख्या की यह ताकत तभी वास्तविक राष्ट्रीय संपदा बन सकती है, जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के पर्याप्त अवसर मिलें। ऐसे में वर्ल्ड स्किल कम्पीटीशनस 2026 में भारतीय युवाओं का शानदार प्रदर्शन देश की युवा शक्ति और कौशल विकास की संभावनाओं को नई पहचान देता है।चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारतीय प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा, परिश्रम और कार्यकुशलता का प्रभावशाली परिचय दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7, लोक कल्याण मार्ग पर भारतीय दल के प्रतिभागियों से संवाद और उनका अभिनंदन इस उपलब्धि को राष्ट्रीय महत्व देने वाला अवसर है। यह सम्मान केवल पदक जीतने वाले युवाओं का नहीं, बल्कि उस भारत की आकांक्षाओं का भी प्रतीक है, जो अपनी युवा शक्ति के बल पर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहता है।
वैश्विक कौशल मंच पर भारत की दमदार उपस्थिति
वर्ल्ड स्किल कम्पीटीशनस में भारत ने 10वां स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने छह रजत पदक और उत्कृष्टता के 20 पदक जीतकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। वर्ष 2024 में फ्रांस के ल्योन में आयोजित प्रतियोगिता में भारत 13वें स्थान पर रहा था। इस बार 10वें स्थान तक पहुंचना अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतिस्पर्धा में भारत की प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत है।इस प्रतियोगिता में भारत का अब तक का सबसे बड़ा दल शामिल हुआ। कुल 70 प्रतिभागियों ने 63 कौशल श्रेणियों में देश का प्रतिनिधित्व किया। बेकरी, डेंटल प्रोस्थेटिक्स, डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिजाइन, औद्योगिक डिजाइन तकनीक, लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग तथा रिटेल सेल्स जैसे विविध क्षेत्रों में भारतीय युवाओं ने अपनी प्रतिभा दिखाई।स्मृति नांबियार, मोहम्मद सलाम, कोविद अजय गंगराडे, पार्थ वोहरा, मेहरुनिसा बेगम और सानिया जोशी ने रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। स्मृति नांबियार को बेकरी कौशल में रजत पदक के साथ भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी का सम्मान भी मिला। ये उपलब्धियां बताती हैं कि उत्कृष्टता केवल पारंपरिक शैक्षणिक डिग्रियों तक सीमित नहीं है। व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से भी भारतीय युवा विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।इन सफलताओं के पीछे प्रतिभागियों के साथ उनके प्रशिक्षकों, प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योग विशेषज्ञों और परिवारों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने वाला प्रदर्शन वर्षों के परिश्रम, समर्पण और असफलताओं से सीखने का परिणाम होता है।
युवा सशक्तिकरण में प्रधानमंत्री का नेतृत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के केंद्र में रखने, कौशल विकास को व्यापक बनाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर लगातार जोर दिया गया है। स्किल इंडिया ,स्टार्टअप इंडिया ,डिजिटल इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसी पहलों ने कौशल, नवाचार, डिजिटल क्षमता और उद्यमशीलता को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया है।इस दृष्टिकोण की विशेषता यह है कि युवा को केवल नौकरी खोजने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार सृजक, नवप्रवर्तक और कुशल पेशेवर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। बदलती अर्थव्यवस्था में केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं हैं। उद्योगों को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो आधुनिक मशीनों और सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकें, व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकाल सकें, नई तकनीकों को अपना सकें और गुणवत्ता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें।वर्ल्ड स्किल के भारतीय प्रतिभागियों से प्रधानमंत्री का संवाद इसी सोच को आगे बढ़ाता है। कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के समान महत्व देने और युवाओं को बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। डिग्री और व्यावहारिक कौशल एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि एक-दूसरे को मजबूत करने वाली क्षमताएं हैं।प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और अन्य कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण तथा रोजगारोन्मुखी अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इन पहलों की वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाएगी कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को कितना गुणवत्तापूर्ण रोजगार मिलता है, उनकी आय में कितनी वृद्धि होती है और वे कितनी प्रभावी ढंग से अपना उद्यम स्थापित कर पाते हैं।
डिग्री से दक्षता तक: बदलते भारत की जरूरत
भारत में युवा सशक्तिकरण की अगली बड़ी चुनौती शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को कम करना है। अनेक विद्यार्थी वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद रोजगार की तलाश में भटकते हैं, जबकि दूसरी ओर कई उद्योगों को प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की आवश्यकता रहती है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था, कौशल प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को स्पष्ट करती है।विश्व कौशल प्रतियोगिता से मिली सीख यह है कि प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। युवाओं को वास्तविक उपकरणों पर काम करने, आधुनिक तकनीक सीखने, उद्योगों की अपेक्षाओं को समझने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अपनी दक्षता परखने के अवसर मिलने चाहिए।इसके लिए प्रत्येक जिले में स्थानीय रोजगार संभावनाओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। कृषि आधारित क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण और कृषि तकनीक, औद्योगिक क्षेत्रों में मशीन संचालन एवं ऑटोमेशन, पर्यटन क्षेत्रों में आतिथ्य सेवाएं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सॉफ्टवेयर, साइबर सुरक्षा तथा डिजाइन जैसे कौशल युवाओं के लिए नए रास्ते खोल सकते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रतिभा किसी महानगर या संपन्न परिवार की मोहताज नहीं होती। उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर देश के किसी भी हिस्से का युवा वैश्विक मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।

युवा शक्ति को अवसर देना ही विकसित भारत की असली कसौटी
भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त अपने आप आर्थिक समृद्धि में नहीं बदलती। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ प्रशिक्षण, महिलाओं की समान भागीदारी, वित्तीय सहायता और रोजगार के वास्तविक अवसरों की जरूरत है। कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार परिणामों का नियमित मूल्यांकन करना भी आवश्यक है।विश्व कौशल प्रतियोगिता में सफल भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण संस्थानों और विद्यालयों में प्रेरक वक्ता तथा मार्गदर्शक के रूप में जोड़ने की पहल की जा सकती है। उनके अनुभव विद्यार्थियों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि बेकरी, औद्योगिक डिजाइन, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल मीडिया और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी सम्मानजनक करियर बनाया जा सकता है।साथ ही, कौशल आधारित व्यवसायों को सामाजिक प्रतिष्ठा देना होगा। युवाओं और अभिभावकों की सोच में यह बदलाव आवश्यक है कि सफलता का रास्ता केवल कुछ चुनिंदा पेशों से होकर नहीं गुजरता। अपनी रुचि, योग्यता और प्रशिक्षण के अनुरूप चुना गया कौशल भी आर्थिक आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और सामाजिक सम्मान का आधार बन सकता है।
अभिनंदन के साथ भविष्य का संकल्प
लोक कल्याण मार्ग पर भारतीय कौशल प्रतिभागियों का अभिनंदन केवल पदक विजेताओं को बधाई देने का अवसर नहीं, बल्कि भारत की युवा शक्ति पर विश्वास व्यक्त करने का भी क्षण है। प्रधानमंत्री का इन युवाओं से संवाद कौशल, तकनीकी अनुकूलन और व्यावहारिक ज्ञान को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं में स्थान देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।हालांकि, किसी प्रतियोगिता में मिली सफलता को व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में बदलने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की भागीदारी, रोजगार के परिणाम और युवाओं की आय जैसे संकेतकों पर ध्यान देना होगा। प्रत्येक युवा को अपनी क्षमता विकसित करने, अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।शंघाई में भारतीय प्रतिभागियों की उपलब्धि इसी संभावना की सशक्त झलक है। यह सफलता बताती है कि भारत का युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की परिवर्तनकारी शक्ति भी है।
युवाओं के हाथों में हुनर, मन में आत्मविश्वास और सामने अवसर हों, तो विकसित भारत का सपना वास्तविकता में बदल सकता है।
विश्व कौशल मंच से लोक कल्याण मार्ग तक पहुंची यह सफलता केवल आज की उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि उस भारत के निर्माण का संकल्प होनी चाहिए, जहां कौशल को सम्मान मिले, प्रतिभा को अवसर मिले और प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र की प्रगति में अपनी सार्थक भूमिका निभा सके।प्रधानमंत्री जी, भारत के करोड़ों युवाओं के सपने तभी उड़ान भरेंगे, जब उनके हुनर को अवसर, उनके परिश्रम को सम्मान और उनकी प्रतिभा को सही मंच मिलेगा। विश्व कौशल प्रतियोगिता में चमके ये युवा उसी नए भारत की झलक हैं, जहां युवा केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र का भविष्य गढ़ने वाले बनेंगे

डॉ. नयन प्रकाश गांधी -पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट





वैश्विक कौशल मंच पर भारत की दमदार उपस्थिति
युवा सशक्तिकरण में प्रधानमंत्री का नेतृत्व
डिग्री से दक्षता तक: बदलते भारत की जरूरत