Thursday, October 1, 2026
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विश्व वयोवृद्ध दिवस पर वृद्धजन विमर्श एवं सम्मान समारोह आयोजित

बिगुल जैन ✍️

“अनुभव और ज्ञान समाज की अमूल्य धरोहर हैं

कोटा। विश्व वयोवृद्ध दिवस के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में वृद्धजनों के सम्मान, उनके अनुभवों के संरक्षण तथा समाज में उनकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से “वृद्धजन विमर्श एवं सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुस्तकालय से जुड़े वयोवृद्ध पाठकों एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया तथा उल्लेखनीय योगदान देने वाले दो वरिष्ठ पाठकों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा मुद्गल, प्रोफेसर, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. नीलम काबरा, असिस्टेंट प्रोफेसर ने की। मुकेश गौर, पुस्तकालयाध्यक्ष, एक्सीलेंट विधि महाविद्यालय, कोटा विशिष्ट अतिथि तथा मधुसूदन चौधरी, पुस्तकालयाध्यक्ष, गीतांजली मेडिकल कॉलेज, जयपुर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे।

वयोवृद्ध पाठकों का सम्मान

समारोह में पुस्तकालय से नियमित रूप से जुड़े वयोवृद्ध पाठकों की सक्रियता और पुस्तकालय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर वयोवृद्ध किसान एवं पुस्तकालय पाठक श्री कन्हैया लाल गोचर को उनकी नियमित पठन-पाठन गतिविधियों एवं पुस्तकालय से निरंतर जुड़ाव के लिए “बेस्ट रीडर ऑफ द ईयर–2026” की ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इसी क्रम में वयोवृद्ध मंच संचालक एवं पाठक श्री के. बी. दीक्षित को उनकी रचनात्मक सोच, सक्रिय सामाजिक सहभागिता एवं मंचीय अभिव्यक्ति के लिए “बेस्ट क्रिएटिव थिंकर अवार्ड–2026” की ट्रॉफी प्रदान की गई।

। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए अध्ययन के साथ-साथ संवाद, मानसिक सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। । उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान देने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा और अनुभव का उपयोग सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में किया जाना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि मुकेश गौर ने कहा कि पुस्तकालय वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय एवं रचनात्मक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पुस्तकालय वरिष्ठजनों को अपनी रुचियों के अनुरूप ज्ञान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।

गेस्ट ऑफ ऑनर मधुसूदन चौधरी ने कहा कि वयोवृद्धों के अनुभव समाज की अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर उनके जीवनानुभवों से सीख लेनी चाहिए।

राधा विहारी मालव ने वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक अनुभव और सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वृद्धजनों को केवल सहायता प्राप्त करने वाले वर्ग के रूप में नहीं, बल्कि समाज के अनुभवी मार्गदर्शक और सक्रिय सहभागी के रूप में देखा जाना चाहिए।

ईश्वर मीना ने कहा कि पुस्तकालय में वरिष्ठ पाठकों की निरंतर उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि पढ़ने की आदत उम्र की सीमा से परे है।

दिव्यांश जांगीड़ ने कहा कि युवा पीढ़ी और वरिष्ठ नागरिकों के बीच संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों की जीवन यात्रा और अनुभव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

रोहित कुमार शर्मा ने पुस्तकालय की सेवाओं में वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने तथा उनके लिए सहज, सम्मानजनक और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।

हरिओम नागर ने कहा कि समाज में वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा बनाए रखना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक दायित्व है।

सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम संयोजिका डॉ. शशि जैन द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों एवं उपस्थित पाठकों द्वारा वृद्धजन सम्मान और उनकी सामाजिक भूमिका पर विचार साझा किए.

समारोह में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि सार्वजनिक पुस्तकालय केवल पुस्तकें उपलब्ध कराने वाली संस्था नहीं हैं, बल्कि वे सामुदायिक संवाद, आजीवन शिक्षा, सांस्कृतिक सहभागिता और सामाजिक समावेशन के केंद्र के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुस्तकालय में नियमित पाठक मिलन, अनुभव साझाकरण होता है

समारोह के अंत में कनिष्ठ सहायक सीमा वर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, सम्मानित वयोवृद्ध पाठकों एवं उपस्थित प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के प्रबंधन की जिम्मेदारी रोहित नामा ने संभाली, जबकि मंच संचालन परामर्शदाता रामनिवास धाकड़ ने प्रभावी ढंग से किया।

समारोह का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि वृद्धावस्था जीवन का अवसान नहीं, बल्कि अनुभव, ज्ञान और सामाजिक मार्गदर्शन की समृद्ध अवस्था है। वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, संवाद और सक्रिय सहभागिता का अवसर देकर समाज उनकी जीवनभर की अर्जित पूंजी—अनुभव और ज्ञान—का लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकता है।

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