Wednesday, April 22, 2026
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साहित्य- आओ मिलकर वन संपदा बचाएंं…कवि-के.सी.राजपूत

आओ मिल बन संपदा बचाएं…

 

आओ वन संपदा बचाएं, मिलकर सब करते हैं कर्म ।

ऐसा ही हो कर्तव्य तुम्हारा, तब उन्नत होगा ये धर्म ।।

अगर जमीं यह उचित नहीं, तब इसका बदलो स्थान ।

सब कुछ आसान नहीं यह, प्रभु बढ़ाए इनका मान ।।

मूल सहित इसको तुम खोदो, दे दो इसको उचित जमीन ।

काम तो कुछ जटिल सा है, पर तुम मत होना उदासीन ।।

मिलकर हम सब कर्म करेंगे, मूल सहित ही लेंगे उखाड़ ।

दृढ़ रहेगी शक्ति हमारी, हमें न रोक सकेगा पहाड़ ।।

आओ जरा ताकत तो दे दो, मिलकर करते हैं प्रस्थान ।

पहले ही हम खोज चुके हैं, इसके लिए उचित स्थान ।।

रहने को उचित जमीन मिलेगी, अब खूब मिलेगा पानी ।

मिलकर वन संपदा बचाओ, कहती हैं सबकी नानी ।।

फूलेगा और फलेगा तरु यह, अब नई जगह पर जाकर ।

हम सब भी उत्साहित हैं अब, ऐसे युवकों को पाकर ।।

साधुवाद के पात्र युवक यह, इनका गजब बना उत्साह ।

कितना उत्तम कर्म किया है, हमें भी जागी है अब चाह ।।

(के. सी. राजपूत, कोटा)

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