आओ मिल बन संपदा बचाएं…
आओ वन संपदा बचाएं, मिलकर सब करते हैं कर्म ।
ऐसा ही हो कर्तव्य तुम्हारा, तब उन्नत होगा ये धर्म ।।
अगर जमीं यह उचित नहीं, तब इसका बदलो स्थान ।
सब कुछ आसान नहीं यह, प्रभु बढ़ाए इनका मान ।।
मूल सहित इसको तुम खोदो, दे दो इसको उचित जमीन ।
काम तो कुछ जटिल सा है, पर तुम मत होना उदासीन ।।
मिलकर हम सब कर्म करेंगे, मूल सहित ही लेंगे उखाड़ ।
दृढ़ रहेगी शक्ति हमारी, हमें न रोक सकेगा पहाड़ ।।
आओ जरा ताकत तो दे दो, मिलकर करते हैं प्रस्थान ।
पहले ही हम खोज चुके हैं, इसके लिए उचित स्थान ।।
रहने को उचित जमीन मिलेगी, अब खूब मिलेगा पानी ।
मिलकर वन संपदा बचाओ, कहती हैं सबकी नानी ।।
फूलेगा और फलेगा तरु यह, अब नई जगह पर जाकर ।
हम सब भी उत्साहित हैं अब, ऐसे युवकों को पाकर ।।
साधुवाद के पात्र युवक यह, इनका गजब बना उत्साह ।
कितना उत्तम कर्म किया है, हमें भी जागी है अब चाह ।।
(के. सी. राजपूत, कोटा)






