Tuesday, September 15, 2026
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कृषि विश्वविद्यालय, कोटा ने हर्षोल्लास से मनाया अपना 14वां स्थापना दिवस एवं हिन्दी दिवस

बिगुल जैन ✍️

कोटा /कृषि विश्वविद्यालय, कोटा का 14वां स्थापना दिवस  सोमवार 14  को विश्वविद्यालय प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

समारोह कार्यक्रम डॉ. विमला डूंकवाल, कुलगुरू महोदया, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री पाशा पटेल, अध्यक्ष महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग, महाराष्ट्र सरकार तथा विशिष्ठ अतिथि डॉ. जेड, एस. सोलंकी, पूर्व एवं संस्थापक कुलगुरू, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा व बाबा श्री निरंजन दास जी महाराज, गोरक्षा धाम रहे। कार्यक्रम में डॉ. विरेन्द्र सिंह, -निदेशक छात्र कल्याण द्वारा स्वागत उद्घोदन दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं बैन्यू मैन ऑफ इंडिया श्री पाशा पटेल ने अपने उद्बोधन में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियां कृषि के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। उन्होंने तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों (Fast Growing Species) बाँस इत्यादि को कृषि प्रणाली में शामिल करने पर विशेष जोर देते हुए वृक्ष आधारित कृषि को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि में वृक्षों एवं ऐसी प्रजातियों का समादेश पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित कर सकता है। उन्होंने मृदा में कार्बन के संरक्षण एवं संचयन को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि गृदा में कार्बन का संरक्षण मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बाबा श्री निरंजन दास जी महारज ने कृषि में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके उपयोग को कम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आज की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि परिवेश को आध्यात्मिक व रोचक तरीके से प्रस्तुत किया।

विशिष्ट अतिथि एवं कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के पूर्व एवं संस्थापक कुलगुरु डॉ. जेड.एस. सोलंकी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में फल उत्पादन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर कृषि उपज के मूल्य संवर्धन (Value Addition) एवं प्रसंस्करण की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने हाईटेक खेती, संरक्षित खेती तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि बदलते समय के अनुरूप कृषि को अधिक तकनीक आधारित एवं बाजारोन्मुख बनाना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की कुलगुरु महोदया डॉ. विमला डंकवाल ने अपने अध्यक्षीय उ‌द्बोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों एवं नवीन कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि को अधिक सक्षम, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाना होगा, ताकि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ किसानों की आय को भी सुदृढ किया जा सके।

उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को बदलती जलवायु आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने पर भी बल दिया। तथा उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य के राष्ट्र निर्माण में योगदान हेतु प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय द्वारा किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों को पहुंचाने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

स्थापना दिवस कार्यक्रम के समन्वयक एवं निदेशक छात्र कल्याण, डॉ. विरेन्द्र सिंह ने कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की गत वर्ष की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण दिया।

विश्वविद्यालय के निदेशक पी. एम. एण्ड ई. व जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. मुकेश चन्द गोयल ने बताया कि इस अवसर पर विश्वविद्यालय कार्मिकों को उनके द्वारा किये गये उल्लेखनीय कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार डॉ. राकेश कुमार यादव, सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. एच. पी. मेघवाल, सर्वश्रेष्ठ प्रसार शिक्षाविद् पुरस्कार डॉ गुंजन सनाढ्य तथा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार श्रीमती मंजू मीना को प्रशस्ति पत्र तथा स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के द्वारा विभिन्न कृषक हितार्थ प्रकाशनों, द्विभाषीय कृषि विश्वविद्यालय कोटा त्रैमासिक समाचार पत्र तथा मशरूम उत्पादन तकनीकी पुस्तिका, सोइल साइंस की क्विज पुस्तिका, तथा तीन मैनुअलों का अतिथियों के द्वारा विमोचन किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालयों के छात्रों द्वारा विविध रंगारंग एवं मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गई।

विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के साथ-साथ हिन्दी दिवस भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हिन्दी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें वीर रस के कवि श्री राजेन्द्र पंवार, श्रृंगार रस के कवि श्री लोकेश मृदुल, हास्य रस के कवि श्री दुर्गाशंकर धांसू एवं राजस्थानी कवि श्री अखिलेश अखिल ने अपनी मनमोहक काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

स्टॉफ स्पोर्ट मीट के तहत दो दिवसीय विभिन्न खेलकूद प्रतियोगताओं का भी आयोजन शुरू हुआ.जो कल तक जारी रहेगा।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्रीमती मनीषा तिवारी व वित्त नियंत्रक श्री महेश चन्द मीना, निदेशक अनुसंधान डॉ. एम.सी. जैन, निदेशक पी.एम. एंड ई. डॉ. मुकेश चन्द गोयल, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेन्द्र सिंह, निदेशक मानव संसाधन विकास डॉ. डी. के. सिंह, निदेशक शिक्षा डॉ. जितेन्द्र सिंह, निदेशक भू-परिदृश्य एवं राजस्व सृजन डॉ. आशुतोष मिश्र तथा निदेशक छात्र कल्याण डॉ. विरेन्द्र सिंह, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़ के अधिष्ठाता डॉ. आई.बी. मौर्य, कृषि महाविद्यालय, कोटा के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. जैन, कृषि महाविद्यालय, हिण्डौली के अधिष्ठाता डॉ. एन.एल. मीना, परीक्षा नियंत्रक डॉ. हरीश वर्मा एवं संपदा अधिकारी इंजी. दुइशा शर्मा, कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. भवानी शंकर मीना सहित कृषि विज्ञान केन्द्रों, यांत्रिक कृषि फार्म एवं अनुसंधान केन्द्रों के सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सह-निदेशक मानव संसाधन विकास डॉ. बी.एल. ढाका ने धन्यवाद ज्ञापित किया, तथा संचालन डॉ. नीतू मेहता व तनुश्री नन्दवाना द्वारा किया गया।

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