Sunday, November 1, 2026
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11 कन्याओं का पूजन कर दिया बालिका संस्कार, हिंदी प्रचार और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

11 कन्याओं का पूजन कर दिया बालिका संस्कार, हिंदी प्रचार और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

कोटा। बोरखेड़ा स्थित आश्रम में अखिल भारतीय गायत्री कौशिक परिवार, वीरांगना कन्या संस्कार केंद्र उज्जैन-रतलाम-चंडीगढ़ तथा वरिष्ठ जन कल्याण समिति एवं आनंद अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संयुक्त सहयोग से पर्यावरण संरक्षण, बालिका संस्कार एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी एवं आनंद अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के निदेशक अरुण भार्गव उपस्थित रहे। संत गोविंदाचार्य जी के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और लोककल्याण की भावना से गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया। योगाचार्य कुलदीप मिश्रा ने गायत्री मंत्रों के साथ श्रद्धालुओं से आहुतियां दिलवाकर यज्ञ संपन्न कराया।

कार्यक्रम के दौरान गाय के गोबर से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधि-विधान से स्थापना एवं पूजन किया गया। गायत्री मंदिर के पुजारी पंडित राधाचरण शर्मा, वृंदावनवासी ने वैदिक विधि से पूजन कराया। इस अवसर पर यज्ञदत्त हाड़ा ,आकाश भार्गव, अर्चना राजावत, डी के नाबार, संदीप सिंह नरूका व अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 11 कन्याओं का पूजन रहा। अतिथियों ने कन्याओं के चरण धोकर उनका पूजन किया, तिलक लगाया तथा मोतियों की माला और चुनरी भेंट कर सम्मानित किया। वरिष्ठ जन कल्याण समिति एवं स्काउट-गाइड की ओर से बालिकाओं को गोबर से निर्मित दीपक, कलम एवं पेन सेट सहित पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपयोगी सामग्री भेंट की गई।

संत गोविंदाचार्य जी ने मुख्य अतिथि अरुण भार्गव के माध्यम से सभी बालिकाओं को ‘गीता दर्शन’ पुस्तिका भेंट करवाई। उन्होंने कहा कि बालिकाएं राष्ट्र की धरोहर हैं और उनके संस्कार, शिक्षा तथा व्यक्तित्व निर्माण से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। पर्यावरण संरक्षण के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि अरुण भार्गव ने कहा कि गणेश जन्मोत्सव के साथ आज हिंदी दिवस भी है। हिंदी हमारी मातृभाषा और हमारी सांस्कृतिक पहचान है। हमें हिंदी के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार के साथ भारतीय संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि शंभूसिंह कौशिक की मानव निर्माण योजना, कन्या संस्कार केंद्र, पर्यावरण संरक्षण, बालिका संस्कार एवं हिंदी प्रचार-प्रसार की पहल समाज के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने कहा कि गाय के गोबर से गणेश प्रतिमा एवं दीपक बनाना पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी सोच का सुंदर उदाहरण है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ जन कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं कौशिक परिवार के प्रधान संचालक यज्ञदत्त हाड़ा ने किया। अंत में एस.के. अग्रवाल ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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