बाराँ,5 सितम्बर ।शाहबाद के जंगलों, प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अब ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ देश की राजधानी नई दिल्ली की दहलीज तक पहुंचेगा। आगामी 6 और 7 सितम्बर 2026 को मावलंकर हॉल, रफी मार्ग (नई दिल्ली) में ‘आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘आदिवासी अधिकारों के लिए राष्ट्रीय संघर्ष सम्मेलन’ में शाहबाद क्षेत्र के सहरिया आदिवासी बड़ी संख्या में भाग लेकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे।
सहरिया आदिवासी विकास मंच, शाहबाद के प्रवक्ता एवं शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता श्री विजय राघव ने जानकारी देते हुए बताया कि शाहबाद के जंगल, पहाड़, नदियां और वन्य जीव केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह सहरिया समाज के अस्तित्व, पहचान और आजीविका की जीवनरेखा हैं। सहरिया समुदाय सदियों से आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षक रहा है और कुल्हाड़ी उनके जीवनयापन, सुरक्षा व संरक्षण का प्रतीक रही है।
श्री विजय राघव ने अपने वक्तव्य में कहा कि सम्मेलन में शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत आदिवासी समाज को हाइड्रो पावर प्लांट से पहुंचने वाली हानि और उनके जीवन यापन करने हेतु जंगल की अनिवार्यता , उनकी परंपरागत संस्कृति, पर्यावरण,परिवेश,सामाजिक ढांचागत विकास को होने वाली हानि पर चर्चा कर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के फैसले को बदलने की मांग की जाएगी।
यह कार्यक्रम आदिवासी अधिकारों के लिए राष्ट्रीय संघर्ष सम्मेलन के रूप में दिल्ली में
दिनांक 6 एवं 7 सितम्बर को मावलंकर हॉल, रफी मार्ग, नई दिल्ली, में आयोजित किया जाएगा
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच शाहबाद के सदस्य श्री राघव ने क्षेत्र के सभी प्रकृति प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों से ‘शाहबाद बचाओ, जंगल बचाओ’ के इस संकल्प में एकजुट होकर समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ” सम्मेलन में मंच की ओर से मुख्य मुद्दा ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ के तहत जल, जंगल, जमीन, पहाड़ व वन्य जीवों का संरक्षण रहेगा। यह कार्यक्रम आदिवासी अधिकारों के लिए राष्ट्रीय संघर्ष सम्मेलन के रूप में दिल्ली में दिनांक 6 एवं 7 सितम्बर , को मावलंकर हॉल, रफी मार्ग, नई दिल्ली, में आयोजित किया जाएगा
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच शाहबाद के सदस्य श्री राघव ने क्षेत्र के सभी प्रकृति प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों से ‘शाहबाद बचाओ, जंगल बचाओ’ के इस संकल्प में एकजुट होकर समर्थन देने की अपील की है।






