Thursday, September 3, 2026
Screenshot_2026-02-16-14-04-33-20_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

शिक्षक दिवस : ज्ञान के हस्तांतरण से भविष्य के निर्माण तक — फार्मेसी शिक्षा के बदलते आयाम

शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का भी दिन है। यह हमें यह प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में केवल पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं, या आने वाली पीढ़ी को जीवन, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक भी बना रहे हैं?

फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक दशकों तक अध्यापन करते हुए, देश के विभिन्न राज्यों में कार्य करने और अनेक देशों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक प्रणालियों को निकट से देखने का अवसर मिला है। इस अनुभव ने एक बात स्पष्ट रूप से सिखाई है—शिक्षा की गुणवत्ता केवल आधुनिक भवनों, प्रयोगशालाओं, डिग्रियों और तकनीक से निर्धारित नहीं होती; उसकी वास्तविक गुणवत्ता शिक्षक की दृष्टि, विद्यार्थी की जिज्ञासा और दोनों के बीच स्थापित विश्वास से निर्धारित होती है।

आज भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति वाला देश है और फार्मेसी शिक्षा इस युवा शक्ति को स्वास्थ्य सेवा, औषधि अनुसंधान, दवा निर्माण तथा रोगी देखभाल के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेकिन हमें ईमानदारी से स्वीकार करना होगा कि फार्मेसी शिक्षा आज एक संक्रमण काल से गुजर रही है। उद्योग की अपेक्षाएँ बदल रही हैं, स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकताएँ बदल रही हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ, बायोटेक्नोलॉजी तथा प्रिसीजन मेडिसिन जैसे क्षेत्र तेजी से भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।

ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका केवल “क्या पढ़ाना है” तक सीमित नहीं रह सकती। अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—“विद्यार्थी को कैसे सोचना सिखाया जाए?”

पुस्तक ज्ञान से आगे बढ़ने की आवश्यकता

फार्मेसी शिक्षा में लंबे समय तक परीक्षा-केंद्रित अध्ययन प्रणाली का प्रभाव रहा है। विद्यार्थी विषयों को पढ़ते हैं, परीक्षाएँ उत्तीर्ण करते हैं और डिग्री प्राप्त कर लेते हैं। किंतु वास्तविक चुनौती तब प्रारंभ होती है, जब उन्हें उद्योग, अस्पताल, अनुसंधान संस्थान या समाज में अपनी भूमिका निभानी होती है।

एक अच्छा फार्मेसी शिक्षक केवल फार्माकोलॉजी, फार्मास्यूटिक्स या फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री नहीं पढ़ाता। वह विद्यार्थी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या समाधान की क्षमता, नैतिकता, संवाद कौशल और रोगी के प्रति संवेदनशीलता विकसित करता है।

हमें विद्यार्थियों को केवल यह नहीं सिखाना चाहिए कि कोई दवा कैसे बनती है, बल्कि यह भी समझाना चाहिए कि उस दवा के पीछे एक रोगी का विश्वास और जीवन जुड़ा हुआ है।

विश्व अनुभव और भारतीय शिक्षा की शक्ति

विभिन्न देशों की शिक्षण एवं फार्मेसी प्रणालियों को देखने के बाद यह अनुभव हुआ कि भारत के विद्यार्थियों में प्रतिभा, परिश्रम और अनुकूलन क्षमता की कोई कमी नहीं है। हमारी सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा का अभाव नहीं, बल्कि उसे सही दिशा, पर्याप्त अवसर और व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है।

विश्व के अनेक विकसित देशों में शिक्षा का केंद्र केवल शिक्षक नहीं, बल्कि विद्यार्थी और उसकी सीखने की क्षमता होती है। वहाँ कक्षा में प्रश्न पूछने को प्रोत्साहित किया जाता है, प्रयोगशालाओं में त्रुटियों से सीखने का अवसर मिलता है और अनुसंधान को केवल प्रकाशन का माध्यम नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान का उपकरण माना जाता है।

भारत को भी अपनी शिक्षा व्यवस्था में इसी दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा। हमें रटने की संस्कृति से समझने की संस्कृति, अंकों की दौड़ से कौशल की पहचान और डिग्री प्राप्त करने की मानसिकता से ज्ञान सृजन की सोच की ओर बढ़ना होगा।

फार्मेसी शिक्षक : भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माता

फार्मेसी अब केवल दवा वितरण तक सीमित पेशा नहीं है। आज फार्मासिस्ट औषधि विकास, क्लिनिकल रिसर्च, फार्माकोविजिलेंस, अस्पताल फार्मेसी, कम्युनिटी हेल्थ, रेगुलेटरी अफेयर्स, डिजिटल हेल्थ और अनुसंधान जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसलिए फार्मेसी शिक्षक को भी निरंतर स्वयं को बदलना होगा।

जो शिक्षक वर्षों पुरानी नोटबुक और पुराने उदाहरणों के आधार पर नई पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार करना चाहता है, वह अनजाने में विद्यार्थियों के साथ अन्याय कर रहा है। शिक्षक का ज्ञान स्थिर नहीं हो सकता, क्योंकि विज्ञान स्थिर नहीं है।

आज आवश्यकता है कि शिक्षक स्वयं भी निरंतर सीखते रहें, उद्योग से जुड़ें, अनुसंधान में सक्रिय रहें, नई तकनीकों को समझें और विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं से जोड़ें।

हिमाचल प्रदेश : अवसरों की एक नई प्रयोगशाला

हिमाचल प्रदेश जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य में फार्मेसी शिक्षा के लिए अपार संभावनाएँ हैं। औषधीय पौधों की विशाल जैव विविधता, पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, प्राकृतिक संसाधन और वैज्ञानिक संस्थानों की उपस्थिति हमें अनुसंधान और नवाचार की एक विशिष्ट दिशा प्रदान कर सकती है।

सभी प्रदेशों के संस्थानों को भीं डिग्री प्रदान करने के साथ-साथ ही ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए।

हमें स्थानीय औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक शोध, हर्बल ड्रग स्टैंडर्डाइजेशन, फाइटोफार्मास्यूटिकल्स, ड्रग डिलीवरी सिस्टम, हेल्थ टेक्नोलॉजी और ग्रामीण स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर केंद्रित अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा।

नई पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी सीख

आज के विद्यार्थी अत्यंत बुद्धिमान हैं, तकनीक से जुड़े हैं और जानकारी तक उनकी पहुँच पहले की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर है।

इंटरनेट जानकारी दे सकता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्तर दे सकती है, लेकिन विवेक, मूल्य, नैतिकता और मानवीय संवेदनशीलता का निर्माण एक अच्छे शिक्षक के मार्गदर्शन से ही होता है।

इसलिए शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं हो रही है—बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण हो रही है।

हमें विद्यार्थियों को केवल सफल प्रोफेशनल नहीं, बल्कि अच्छे इंसान भी बनाना होगा। उन्हें यह समझाना होगा कि करियर महत्वपूर्ण है, लेकिन चरित्र उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है; सफलता आवश्यक है, लेकिन संवेदनशीलता अनिवार्य है।

शिक्षक दिवस पर आत्ममंथन

शिक्षक दिवस के अवसर पर हमें केवल सम्मान समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें स्वयं से कुछ कठिन प्रश्न पूछने चाहिए—

क्या हमारे विद्यार्थी केवल परीक्षा पास कर रहे हैं या वास्तव में सीख रहे हैं?

क्या हमारी प्रयोगशालाएँ केवल निरीक्षण के समय सक्रिय होती हैं या वहाँ वास्तविक अनुसंधान भी हो रहा है?

क्या हमारे शिक्षक स्वयं निरंतर सीख रहे हैं?

क्या हमारी शिक्षा उद्योग और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या हम अपने विद्यार्थियों के भीतर बेहतर भविष्य का विश्वास पैदा कर पा रहे हैं?

अंतिम संदेश

मेरे लंबे शिक्षण अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार कोई पद, सम्मान या प्रमाणपत्र नहीं होता। शिक्षक का वास्तविक सम्मान तब होता है जब वर्षों बाद कोई विद्यार्थी आकर कहता है—

“सर, आपने मुझे केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि दी।”

यही शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

शिक्षा एक नौकरी नहीं है; यह पीढ़ियों के निर्माण की जिम्मेदारी है। फार्मेसी शिक्षक के रूप में हमारी जिम्मेदारी और भी अधिक है, क्योंकि हम केवल एक पेशेवर नहीं, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के सहभागी तैयार कर रहे हैं।

इस शिक्षक दिवस पर आइए हम संकल्प लें कि हम स्वयं को भी निरंतर शिक्षित करेंगे, अपनी शिक्षण पद्धतियों को समय के साथ बदलेंगे और विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ जिज्ञासा, नैतिकता, संवेदनशीलता तथा राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करेंगे।

क्योंकि एक श्रेष्ठ शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं बदलता—वह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

— Prof. Dr. Mahendra Singh Ashawat 

Director Cum Principal Laureate Institute of Pharmacy (An UGC Autonomous- NAAC – A grade)Jawlaji

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles