महावीर सेन जयस्थल- बूंदी ✍️
राजसमंद। शामलात भूमि और चारागाह की स्थिति का जायजा लेने के लिए कोटा, बूंदी और बारां से पहुंची संयुक्त टीम ने राजसमंद क्षेत्र का दौरा किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर शामलात एवं चारागाह भूमि का निरीक्षण किया और स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा कर भूमि संरक्षण एवं विकास से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया।
निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने चारागाह भूमि पर ग्रामीणों के साथ बैठकर शामलात भूमि को अतिक्रमण से बचाने, चारागाहों के संरक्षण तथा उनके विकास को लेकर विचार-विमर्श किया। इस दौरान स्थानीय स्तर पर भूमि की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की आवश्यकता और भविष्य में चारागाह विकास के संभावित प्रयासों पर चर्चा हुई।
टीम ने कहा कि सामुदायिक उपयोग की शामलात एवं चारागाह भूमि ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है। इसके संरक्षण के लिए स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी और जागरूकता आवश्यक है। निरीक्षण का उद्देश्य जमीनी स्थिति को समझना और संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाना रहा।
इस अवसर पर फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल आईटीसी मिशन, भीलवाड़ा से कैलाश जी शर्मा, सुरेश वैष्णव, राजेंद्र सेन, वन मित्र नवल किशोर दांगी, मेट, राधाकिशन लोधा, प्रकाश सहरिया, भंवर सिंह सहरिया, महावीर सेन, जगदीश प्रसाद मीणा, भारत मेहरा, दीनदयाल मीणा, राकेश कुमार और शिवराज सुमन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
- मुख्य मुद्दे:
- शामलात भूमि की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण
- चारागाह भूमि का संरक्षण
- अतिक्रमण से बचाव पर चर्चा
- चारागाह विकास के लिए ग्रामीणों की भागीदारी
- स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना
- *थाना गांव विजिट रिपोर्ट*
- स्थान: थाना गांव
- गतिविधि: चारागाह विजिट
- प्रतिभागी: संस्था के प्रतिनिधि, समुदाय लीडर
- *1. विजिट का उद्देश्य*
- थाना गांव में सामुदायिक चारागाह के विकास, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रक्रिया को समझने के उद्देश्य से गांव के चारागाह क्षेत्र का भ्रमण किया गया। विजिट के दौरान चारागाह में उपलब्ध विभिन्न वानस्पतिक प्रजातियों, घास एवं प्राकृतिक पुनर्जनन का अवलोकन किया गया तथा समुदाय द्वारा किए गए प्रयासों और वर्तमान स्थिति को समझा गया।
- *2. परिचय एवं चारागाह के संबंध में जानकारी*
- विजिट के प्रारंभ में सभी प्रतिभागियों का आपसी परिचय कराया गया। इसके पश्चात भँवर लाल गुर्जर द्वारा गांव के चारागाह के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई। उन्होंने चारागाह की पूर्व स्थिति, इसके विकास की आवश्यकता तथा समुदाय द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया।
- उन्होंने यह भी बताया कि चारागाह केवल पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह गांव की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता एवं सामुदायिक आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है।
- *3. चारागाह विकास एवं समुदाय के संघर्ष की कहानी*
- इसके बाद शंकर लाल गर्ग द्वारा चारागाह विकास समिति एवं गांव के लोगों द्वारा किए गए संघर्ष और सामूहिक प्रयासों की कहानी साझा की गई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गांव के लोगों ने निरंतर प्रयास करते हुए भूमि को चारागाह के रूप में विकसित किया।
- उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को चार चरणों (Four Phases) में समझाया—
- प्रारंभिक स्थिति एवं समस्या की पहचान – भूमि की खराब स्थिति, कम वनस्पति एवं चराई से संबंधित समस्याओं को समझना।
- समुदाय का संगठित होना – ग्रामीणों एवं चारागाह विकास समिति द्वारा सामूहिक रूप से निर्णय लेना और संरक्षण के लिए प्रयास शुरू करना।
- भूमि का संरक्षण एवं विकास – चारागाह क्षेत्र में संरक्षण, प्राकृतिक पुनर्जनन, घास एवं स्थानीय वनस्पतियों के विकास तथा आवश्यक प्रबंधन गतिविधियों को अपनाना।
- सुदृढ़ एवं सामुदायिक प्रबंधन – विकसित चारागाह की सुरक्षा, उपयोग के लिए स्थानीय नियम बनाना तथा समुदाय द्वारा निरंतर निगरानी एवं प्रबंधन करना।
- इस पूरी प्रक्रिया से यह समझने का अवसर मिला कि सामुदायिक भागीदारी, निरंतर प्रयास और स्थानीय नियमों के प्रभावी पालन से खराब स्थिति वाली भूमि को एक उपयोगी एवं उत्पादक चारागाह में परिवर्तित किया जा सकता है।
- *4. वर्तमान स्थिति, लाभ एवं स्थानीय नियम*
- वर्तमान में चारागाह विकास की प्रक्रिया से गांव को विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त हो रहे हैं। चारागाह क्षेत्र में घास एवं अन्य स्थानीय वनस्पतियों की उपलब्धता में वृद्धि, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता तथा भूमि की प्राकृतिक स्थिति में सुधार देखने को मिला।
- इसके अतिरिक्त चारागाह से गांव की जैव विविधता, मृदा संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों को भी लाभ प्राप्त हुआ है।
- विजिट के दौरान चारागाह के उपयोग एवं संरक्षण से संबंधित गांव के स्थानीय नियमों के बारे में भी जानकारी दी गई। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य चारागाह को सुरक्षित रखना, अत्यधिक चराई को नियंत्रित करना, विकसित वनस्पतियों की रक्षा करना तथा सभी ग्रामीणों के लिए संसाधनों का समान एवं टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना है।
- *5. अगले दिन के कार्यक्रम की चर्चा*
- विजिट के अंत में अगले दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा पर सभी प्रतिभागियों के साथ चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान किए जाने वाले कार्यों, प्रतिभागियों की भूमिका, समय एवं आवश्यक तैयारियों के संबंध में आपसी सहमति बनाई गई।
पर्यावरण एवं जन चेतना मंच सिलौटी मदारिया फेडरेशन के अध्यक्ष लादूसिंह रावत एवं
प्रशासक शिव लाल गुर्जर ग्राम पंचायत थाणा ने भी विस्तार से अपने अनुभव बताया






