कोटा। राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कोटा में टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के दावेदारों में असंतोष के स्वर सामने आने लगे हैं। इसी बीच पूर्व पार्षद दीनदयाल चोपदार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर अपनी राजनीतिक मंशा साफ कर दी है।
नामांकन के दौरान चोपदार ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों पर टिकट वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि “पैसे वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की कोशिश की जा रही है, जबकि टिकाऊ और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है।”
चोपदार ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अभी तक प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है और टिकट को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि यदि योग्य और लंबे समय से जनता के बीच काम कर रहे कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिला तो इस बार बड़ी संख्या में बगावत देखने को मिल सकती है।
पूर्व पार्षद ने यहां तक कहा कि यदि पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर अपना बोर्ड बनाने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और इस बार चुनाव में पार्टी के बजाय स्थानीय उम्मीदवार की छवि और उसके जनसंपर्क को भी महत्व मिलेगा।
गौरतलब है कि राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर दावेदारों के बीच खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं। दोनों दलों की ओर से प्रत्याशियों के चयन में देरी और संभावित बगावत को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट दावेदारों को मनाने में कितना सफल रहता है और टिकट वितरण के बाद कोटा में कितने नेता निर्दलीय मैदान में उतरते हैं।





