Thursday, August 13, 2026
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वंदे मातरम् एक गीत नहीं,भारत की स्वतंत्रता क्रांति का प्राणतत्व – विष्णु साबू

बारां। कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व विभाग बारां तथा भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) वराह नगरी बारां अध्याय के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय संग्रहालय सभागार में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय “वंदे मातरम् : राष्ट्रचेतना के 150 वर्ष” एवं “विभाजन की विभीषिका : इतिहास, स्मृति और मानवीय पीड़ा” रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के ओजस्वी गायन से हुई, जिसके पश्चात् साहित्यकार भैरूलाल भास्कर और साहित्यकार बच्छराज राजस्थानी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।

मुख्य अतिथि  विष्णु कुमार साबू ,समाजसेवी एवं चेयरमैन, इंटेक एडवाइजरी कमेटी बारां ने कहा कि ” ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता क्रांति का प्राणतत्व और हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का संवाहक है। 150 वर्षों से यह गीत हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता आ रहा है। आज की युवा पीढ़ी को इस ऐतिहासिक चेतना से जोड़ना और देश की सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखना हम सभी का परम दायित्व है।”

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए स्वतंत्र पत्रकार कमलेश चौरसिया ने कहा कि”बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ मंत्र ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश में अभूतपूर्व राष्ट्रभक्ति का संचार किया। इसके साथ ही, देश के विभाजन की विभीषिका इतिहास का वह काला अध्याय है जिसकी मानवीय पीड़ा और विस्थापन के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इतिहास की इन स्मृतियों से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और अखंड भारत का निर्माण कर सकते हैं।”

विशिष्ट अतिथि दिलीप शाह ‘मधुप’ अध्यक्ष, जिला प्रेस क्लब बारां ने राष्ट्रीय भावना से केंद्रित उदबोधन में कहा कि “पत्रकारिता और साहित्य का हमेशा से राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राष्ट्रीय गीतों और ऐतिहासिक प्रसंगों पर इस प्रकार के विमर्श समाज में सकारात्मक चेतना एवं राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ करते हैं।” सेमिनार के अन्य विशिष्ठ अतिथि हेमेन्द्र कुमार अवस्थी संभागीय अधीक्षक, कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, कोटा ने कहा कि “विभाग का निरंतर प्रयास है कि हमारी ऐतिहासिक धरोहरों, राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाया जाए। यह संगोष्ठी हमारी गौरवशाली परंपराओं को नमन करने का एक सराहनीय प्रयास है।”

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए इंटैक एडवाइजरी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि”राष्ट्रचेतना और विभाजन की विभीषिका दोनों ही विषय हमें अपनी जड़ों, त्याग और बलिदान का स्मरण कराते हैं। जब तक हम अपने इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करेंगे, तब तक भारत की एकता और अखंडता अक्षुण्ण रहेगी।”

इंटेक लेडी विंग चेयरमैन नीता शर्मा ने विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ” ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहने चाहिए इससे समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना सतत रूप से विकसित होती रहे।”

समारोह के अंत में सहायक प्रशासनिक अधिकारी संदीप सिंह जादौन ने समस्त अतिथियों, वक्ताओं, साहित्यकारों एवं प्रबुद्ध नागरिकों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के गरिमामय गायन के साथ हुआ।मंच संचालन इंटेक बारां चैप्टर कन्वीनर जितेन्द्र शर्मा पम्मी ने किया।

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