कोटा/लाड़ी – बोहनी एकादशी पर ‘ द्वितीय राज्य स्तरीय लाड़ी फूत्या लोक महोत्सव ‘ का आयोजन कोटा आर्ट गैलरी में सम्पन्न किया गया, जिसका ध्येय ‘ आपणी संस्कृति, आपणी पहचाण ‘ इस कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत भगवान विष्णु के दीप प्रज्वलन से हुई, कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थानी गीतकार मुकुट मणि राज ने गुड़धानी के बारे में बताते हुए कहां कि आज से गुड़ का सेवन करना वर्जित है , मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार अम्बिका दत्त चतुर्वेदी ने कहा- कि ‘ लड़कियां अपने अच्छे वर की कल्पना लाड़ी फूत्या के माध्यम से ही करती है , विशिष्ट अतिथि कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद शालिनी गौतम, लोक संस्कृति के वाहक धन्नालाल मीणा ( हरिहर बाबा) ने लोक संस्कृति के कई गीत गाकर दाद बटोरी, राजस्थान की मृदुल गीतकार मुरलीधर गौड़ द्वारा किया गया, जिसमें लोक संस्कृति में लाड़ी फूत्या के महत्व के बारे में बताया गया,
इस अवसर ‘ लाड़ी फूत्या और चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें लाड़ी फूत्या प्रतियोगिता में प्रथम आन्या सिंह चौबदार, द्वितीय भूमिका मालव और तृतीय स्थान आकांक्षा बैरवा प्राप्त किया और संस्था द्वारा प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया, ‘द ज्याग’ संस्था के संस्थापक धांसू अन्नु सिंह ने अपने उद्बोधन में इस लोक परम्परा को जीवित रखने के लिए अप
लक्ष इस लोक परम्परा को जीवित रखने के लिए अपना मंतव्य प्रकट किया, एस. एस. चौबदार आर्ट गैलरी के संस्थापक शम्भू सिंह चौबदार ने चित्रकला के प्रति छोटे बच्चे में जागरूकता लाने के उपाय सुझाए गए।
कार्यक्रम आर्ट गैलरी से बारहदरी तक ढोल नगाड़ों पर नाचते गाते हर्षोल्लास से जुलूस निकाला गया। बारहदरी पर विधिवत् पूर्वक लड़कियों द्वारा लाड़ियां बहायी गई और लड़कों द्वारा लाड़ियां लूटी गई ।
इस अवसर पर धार्मिक सहिष्णुता का परिचय देते हुए हिन्दू- मुस्लिम सांझी संस्कृति का समन्वय दिखाई दिया।
कार्यक्रम का संचालन रूपनारायण ‘संजय द्वारा किया गया, इस अवसर पर कवि व चित्रकार गोविंद हांकला, शिवकरण नागर, विजय मैथुल, गुमानी सिंह नागर, अनुपमा पंवार, विशाल सहल, हरिराम मीणा, नहुष व्यास, जोधराज परिहार, हेमराज सिंह हेम, डाॅ. शिव लहरी, विजय शर्मा, नरेश शर्मा, अश्वत्थामा दाधीच, सुशील कलवार, सन्नी जैन आदि की उपस्थिति रही





