Wednesday, September 9, 2026
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भारतेंदु हरिश्चंद्र जयंती पर युवा कवि हेम राज सिंह ‘हेम’ के खंड काव्य ‘सौभद्र’ का भव्य विमोचन

बिगुल जैन ✍️

भारतेंदु हरिश्चंद्र जयंती पर युवा कवि हेम राज सिंह ‘हेम’ के खंड काव्य ‘सौभद्र’ का भव्य विमोचन

कोटा। आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा के डॉ. एस. आर. रंगनाथन कन्वेंशनल हॉल में युवा कवि हेम राज सिंह ‘हेम’ के खंड काव्य ‘सौभद्र’ के विमोचन का गरिमामय साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हाड़ौती अंचल सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों, कवियों, चिंतकों एवं साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ज्ञान चंद ‘मर्मज्ञ’, बेंगलुरु रहे। विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता विजय जोशी, विशेष अतिथि विजय राजपुरोहित, अहमदाबाद तथा सारस्वत अतिथि कवि, चिंतक एवं आलोचक धर्मराज भारत ने समारोह को अपनी गरिमामयी उपस्थिति से समृद्ध किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जोधराज परिहार ‘मधुकर’ के स्वागत उद्बोधन से हुआ। इसके पश्चात प्रसिद्ध गीतकार प्रेम शास्त्री द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को साहित्यिक एवं आध्यात्मिक भाव से भर दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन तंवर सिंह हाड़ा ने किया।

‘सौभद्र’ हाड़ौती की समृद्ध प्रबंध काव्य परंपरा की नई कड़ी

मुख्य अतिथि डॉ. ज्ञान चंद ‘मर्मज्ञ’ ने ‘सौभद्र’ की साहित्यिक विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि हाड़ौती अंचल की प्रबंध काव्य परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि जिस सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम, मीरा पुरस्कार विजेता अम्बिका दत्त, तथा केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से राजस्थानी काव्य के लिए सम्मानित मुकुट मणिराज जैसे साहित्य मनीषी उपस्थित हों, वह अपने आप में साहित्यिक गौरव का विषय है।

उन्होंने हाड़ौती की प्रबंध काव्य परंपरा का उल्लेख करते हुए डॉ. दया कृष्ण विजय, गणेश लाल गौतम, गौरीशंकर ‘कमलेश’, डॉ. शांति भारद्वाज ‘राकेश’ और किशन वर्मा जैसे रचनाकारों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इसी गौरवशाली परंपरा में युवा रचनाकार हेम राज सिंह ‘हेम’ ने ‘सौभद्र’ के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।

डॉ. ‘मर्मज्ञ’ ने कहा कि ‘सौभद्र’ केवल एक पौराणिक आख्यान का पुनर्पाठ नहीं है, बल्कि इसे रचनाकार ने अपने समय और वर्तमान राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का प्रयास किया है। कृति में महाभारतकालीन परिवेश, पुरातात्विक संदर्भ, राष्ट्रीय भावबोध तथा राजपूती आन-बान-शान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उन्होंने कृति की भाषा पर चर्चा करते हुए कहा कि इसमें तत्सम शब्दों का प्रभावी प्रयोग, सशक्त बिंब एवं अनूठे प्रतीक दिखाई देते हैं। रचनाकार द्वारा इन बिंबों और प्रतीकों को एक सूत्र में पिरोकर जो काव्यात्मक संसार निर्मित किया गया है, उससे कृति का सौंदर्यबोध उभरकर सामने आता है।

‘सौभद्र’ में दिखाई देती है राष्ट्रीय चेतना

डॉ. ज्ञान चंद ‘मर्मज्ञ’ ने कहा कि ‘सौभद्र’ का पाठ करते हुए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों की काव्य परंपरा की स्मृति हुई। कहीं नरेन्द्र मिश्र, कहीं मेघराज मुकुल, कहीं आल्हा-ऊदल की वीरगाथात्मक परंपरा और कहीं श्यामनारायण पांडेय की ओजस्वी काव्यधारा की प्रतिध्वनि अनुभव होती है। उन्होंने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि रचनाकार ने हिंदी की वीर एवं प्रबंध काव्य परंपरा का गंभीर अध्ययन किया है।

उन्होंने ‘सौभद्र’ के केंद्रीय भाव को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि कृति में निहित वीरता, त्याग, राष्ट्रभाव और बलिदान की भावना आज के कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों की स्मृति को भी जागृत करती है। इस दृष्टि से यह कृति अतीत के पात्रों और घटनाओं को वर्तमान राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का सार्थक प्रयास करती दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि ‘सौभद्र’ वर्तमान राष्ट्रीय विचारधारा और देशभक्ति की भावना को साहित्यिक अभिव्यक्ति प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण कृति है। युवा रचनाकार हेम राज सिंह ‘हेम’ ने इस कृति के माध्यम से हाड़ौती की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का उल्लेखनीय प्रयास किया है।

रचनाकार को बधाई और साहित्यिक संस्थाओं को साधुवाद

समारोह में कृतिकार हेम राज सिंह ‘हेम’ को उनकी कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। उनके पिताश्री राजेन्द्र सिंह ने भी कार्यक्रम में प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित साहित्यप्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया।

वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जब युवा पीढ़ी का साहित्य और पुस्तकों से जुड़ाव चुनौतीपूर्ण माना जाता है, ऐसे समय में एक युवा कवि द्वारा खंड काव्य जैसी गंभीर साहित्यिक विधा में रचना करना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। ‘सौभद्र’ का प्रकाशन युवा साहित्यकारों में भारतीय इतिहास, संस्कृति, वीरता और राष्ट्रीय चेतना के प्रति बढ़ती रुचि का संकेत है।

समारोह में मधुकर काव्य संस्थान, कोटा के साहित्यिक प्रयासों की सराहना करते हुए संस्था को साधुवाद दिया गया। साथ ही कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए तंवर सिंह हाड़ा की भी प्रशंसा की गई।

समारोह का समापन साहित्यकारों, कवियों एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा युवा कवि हेम राज सिंह ‘हेम’ की साहित्यिक यात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामना तथा ‘सौभद्र’ की व्यापक पाठकीय स्वीकार्यता की शुभकामनाओं के साथ हुआ।

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