Tuesday, July 21, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

पेड़ लगाने और बचाने के प्रति कोई गंभीरता नहीं – बृजेश विजयवर्गीय 

पेड़ लगाने और बचाने के प्रति कोई गंभीरता नहीं – बृजेश विजयवर्गीय 

कोटा।इन दिनों हरियालो राजस्थान के नाम पर और एक पेड़ मां के नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे को लेकर पौधा रोपण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की भावना का मजाक बन रहा है पौधा रोपण में।

प्रथम दृष्टया तो ये अभियान बहुत अच्छा लगता है लेकिन इसकी यथार्थता को देखने पर निराशा ही निराशा दिखती है।राज्य सरकार ने प्रशासन को 5 करोड़ वृक्ष लगाने के लक्ष्य दिए हैं। कोटा में 31 लाख पौधा रोपण का लक्ष्य है। प्रशासन खुद जानता है कि यह संभव नहीं है।

कोटा के एक पीएम श्री स्कूल को 600 पौधे का काम दिया गया है।

कोटाशहर में कहीं भी पेड़ लगाने की जगह नहीं बची है हर जगह रोड बाइंडिंग के नाम पर भाटे,सीमेंट कंक्रीट, इंटरलॉकिंग की टाइल्स बेचकर कच्ची जगह को समाप्त कर दिया है और इस बात की पुख्ता व्यवस्था कर दी है कि आने वाली पीढ़ी चाहकर भी पेड़ नहीं लगा सकती। अभी जो पेड़ लगा रहा है यह पेड़ नहीं लग रहे हैं जहां पहले से लगे हुए थे कोटा विकास प्राधिकरण क्षेत्र में लगभग सभी गार्डन आजकल उसके अधीन आ गए हैं वहां पर अनवरत पेड़ों की छंटाई के नाम पर कटाई हो रही है। दादाबाड़ी के शिव पार्क में से बड़े-बड़े पेड़ काटने की ताजा घटना सामने आई ।इसके पहले आल्हा ऊदल पार्क में भी पेड़ों को बेतरतीब छांट कर काट दिया और आए दिन शहर में पेड़ों की कटाई की सूचनाएं आती रहती है। हाल ही बारां के स्वामी विवेकानंद पार्क में काफी पेड़ काट दिए। लोगों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर नाराजगी जताई। गत वर्ष झालावाड़ में सिविल लाइंस के सामने की सड़क पर बड़े बड़े पेड़ काट दिए। कलेक्टर मूकदर्शक बने रहे। आखिर यह पाप कहां जाकर रुकेंगे।

शासन मूकदर्शक बना हुआ है।लेकिन प्रशासन पेड़ों की कटाई को रोकने के प्रति कतई गंभीर नहीं है एक भी मामला नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण ने दर्ज नहीं किया ना कोई कार्यवाही की। संभवत इस कारण भी पेड़ काटने वालों के हौसले बुलंद हैं।

हम बात कर रहे हैं पेड़ लगाने के लक्ष्यों की तो एक विद्यालय के पास 600 पेड़ लगाने का लक्ष्य थौंपा लेकिन बजट नाम मात्र भी नहीं है। अब प्रधानाध्यापिका इस बात को लेकर परेशान है कि लगावें कहां।गड्ढे कैसे हों और पौधे कैसे खरीदें। फिलहाल उन्होंने पेड़ लगाने का विषय ठंडे बस्ते में डाल दिया। कोटा में भी प्रशासनिक स्तर से ऐसी खबर आई थी लक्ष्य पूर्ण करने में पौधारोपण के कार्य में बदलाव किया जाएगा।

हमने पहले भी जिला प्रशासन को कई बार लिखित में सुझाव दिए परंतु प्रशासन की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इससे लगता है कि पौधारोपण रोपण के प्रति न सरकार गंभीर है ना स्थानीय प्रशासन। सिर्फ फोटो सेशन के लिए ही पौधारोपण होकर रह गया है। माननीय जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि प्रशासन को इस बारे में पाबंद करें की पौधारोपण कार्य गंभीरता से हो और उसकी नियमित मॉनिटरिंग हो ।इसके पहले पेड़ लगाने के लिए नए स्थान चयनित किया जाए।

सड़कों पर डिवाइडर पेड़ लगाने लायक बनाए जाएं । अभी वहां पौधे और झाड़ियां लगाई जा रही है। अधिकारी जवाब दें कि बड़े पेड़ क्यों नहीं लगाए।

अनावश्यक सीमेंट कंक्रीट इंटरलाकिंग टाईल्सों को उखाड़ना होगा।सजावटी पौधे लगाने से पर्यावरण सुधार नहीं होंगा। उसके लिए गंभीरता से योजना बद्ध तरीके से काम करना होगा। शहर की दो प्रमुख एजेंसी नगर निगम एवं यूआईटी अब कोटा विकास प्राधिकरण के पास वर्षों से उद्यान अधीक्षक हॉर्टिकल्चर नहीं है काम चलाओ व्यवस्था है सिविल इंजीनियर्स ही उद्यान अधीक्षक और हॉर्टिकल्चरिस्ट का पद संभाले हुए हैं। ऐसे हालात में सिविल इंजीनियरों से क्या अपेक्षा की जा सकती है। उनको यह भी पता नहीं की मलबा क्या होता है और मिट्टी क्या होती है। पेड़ और पौधे का अंतर पता नहीं।अधिकांश पार्कों में मिट्टी की जगह मलबा भर कर मिट्टी की परत बिछा दी गई है।

हमारे माननीयों को इसमें हस्तक्षेप कर प्रशासन को कसना पड़ेगा, अन्यथा केंद्र और राज्य सरकारों के पौधारोपण के लक्ष्य बुरी तरह फेल होने वाले हैं तय है।

बृजेश विजयवर्गीय स्वतंत्र पत्रकार एवं पर्यावरणविद्

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles