Friday, July 3, 2026
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महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम पर मंडल रेल चिकित्सालय कोटा में जागरूकता कार्यशाला आयोजित

63 नर्सिंग विद्यार्थियों सहित चिकित्सा कर्मियों ने लिया भाग, POSH अधिनियम एवं शिकायत प्रक्रिया की दी जानकारी

कोटा। मंडल रेल चिकित्सालय, कोटा के सभाकक्ष में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण)’ विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में 63 नर्सिंग विद्यार्थियों सहित चिकित्सालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लेकर विषय की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी एवं आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की अध्यक्षा डॉ. मनीषा शर्मा ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को गंभीर सामाजिक एवं कानूनी विषय बताते हुए कहा कि किसी भी महिला या पुरुष के साथ किया गया अवांछित, अपमानजनक अथवा असहज लैंगिक व्यवहार यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि POSH अधिनियम-2013 के तहत प्रत्येक संस्थान में यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए स्पष्ट नीतियां बनाना तथा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन करना अनिवार्य है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मौखिक एवं गैर-मौखिक व्यवहार भी शामिल हैं। बिना अनुमति के छूना, अनुचित तरीके से पकड़ना या रास्ता रोकना, अशोभनीय टिप्पणियां करना, भद्दे चुटकुले सुनाना, निजी जीवन से जुड़े अवांछित प्रश्न पूछना, अश्लील संदेश, ई-मेल अथवा चित्र भेजना तथा नौकरी, पदोन्नति या वेतन वृद्धि के बदले यौन संबंध बनाने का दबाव डालना भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी को किसी का व्यवहार अपमानजनक, डराने वाला या शत्रुतापूर्ण महसूस होता है, तो उसे यौन उत्पीड़न माना जा सकता है। कार्यस्थल पर किसी भी व्यक्ति की ‘ना’ का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यालय में आईसीसी का गठन अनिवार्य है तथा समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्य होना आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं को किसी भी आपत्तिजनक व्यवहार का स्पष्ट विरोध करने, अनुचित संदेशों, ई-मेल अथवा अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर आईसीसी अथवा मानव संसाधन विभाग को लिखित शिकायत देने की सलाह दी। गंभीर मामलों में स्थानीय पुलिस से संपर्क करने की भी उन्होंने सलाह दी और कहा कि सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय ने कहा कि वर्तमान सोशल मीडिया के दौर में बच्चियों एवं महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी और तस्वीरें साझा करते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए तथा डिजिटल माध्यमों पर भी सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन पर अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा भटनागर ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और समानता की भावना विकसित करने के लिए लड़कों को भी बचपन से ही उचित संस्कार एवं संवेदनशील व्यवहार की शिक्षा देना आवश्यक है। तभी सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्वस्थ समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।

 

 

 

 

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