-अशफाक अंसारी
कोटा शहर में राशन वितरण व्यवस्था बदहाल होती नजर आ रही है। आमजन को अपने हक का राशन लेने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि जब उनका नंबर आता है तो राशन डीलर साफ मना कर देता है और कहता है, “यह राशन मेरे यहां का नहीं है।” इस वजह से लोगों को एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
सुबह से लाइन, शाम तक इंतजार
स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे रोज सुबह जल्दी उठकर लाइन में लग जाते हैं ताकि समय पर राशन मिल सके। लेकिन कई बार पूरा दिन बीतने के बाद भी उन्हें राशन नहीं मिल पाता। इससे खासतौर पर मजदूर वर्ग और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
ऑनलाइन सिस्टम भी बेअसर
सरकार द्वारा लागू ऑनलाइन राशन वितरण प्रणाली का भी जमीनी स्तर पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। तकनीकी खामियों और समन्वय की कमी के चलते लोगों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उनका राशन किस दुकान से मिलेगा।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
इस अव्यवस्था को लेकर लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। कई लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से अपील
पीड़ित लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले राशन डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आमजन को उनके हक का राशन समय पर मिल सके।
कोटा में पहले से ही बदहाल राशन व्यवस्था के बीच अब आमजन ने एक नई मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि राशन वितरण चालू होने के बाद गेहूं का अतिरिक्त कोटा भी तय किया जाना चाहिए, ताकि अन्य क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों को भी अनाज उपलब्ध हो सके।
क्या है लोगों की मांग?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में राशन केवल निर्धारित दुकान या क्षेत्र तक सीमित रह जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति किसी कारणवश दूसरे क्षेत्र में चला जाए या वहां राशन लेने पहुंचे, तो उसे गेहूं नहीं मिल पाता।






