– गिरिराज महावर
कोटा।मानवता की मिसाल पेश करते हुए शहर के जागरुक, सेवाभावी व समर्पित लोगों ने अपने कामों को छोड़ मरीज की जान बचाने के लिए एबी नेगेटिव ग्रुप का डोनेशन किया। अमुमन यह ग्रुप दुर्लभ से भी अति दुर्लभ है जिसके डोनर्स का मिलना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन एक साथ तीन मरीजों को जब एबी नेगेटिव की आवश्यकता हुई तो टीम जीवनदाता ने अपने प्रयासों को चरम तक किया और उसके बाद बडे कार्य को अंजाम तक पहुंचाया। लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक व टीम जीवनदाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि बूंदी निवासी मरीज श्रवण, बूंदी निवासी मरीज काली बाई और एमपी गुना निवासी मरीज हेमराज कुशवाह को एबी नेगेटिव की आवश्यकता थी। उसके बाद टीम ने जिम्मेदारी को संभाला और एक एक कर डोनर्स को कॉल करना शुरू किया, यह कार्य इतना आसान नहीं था, लेकिन जब प्रयास शुरू किए गए तो मंजिल भी मिली। पहले केस में अनिल पारेता ने ब्लड डोनेशन किया, वह बाहर जयपुर जा रहे थे, लेकिन पहले उन्होंने अपना ब्लड सेंटर पहुंचकर ब्लड डोनेशन किया, वह अब तक 30 बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं और हमेशा तैयार भी रहते हैं। उसके बाद चावल व्यवसायी दिनेश राठी ने ब्लड डोनेशन किया, वह कहते हैं कि हम सभी को ब्लड ग्रुप चेक करवाना चाहिए। वहीं हेमराज नागर लेब टेक्नीशियन हैं, वह इस ग्रुप का महत्व और मरीज के परिजनों का दर्द समझते हैं, इस कारण उन्होंने भी बिना समय गवाए पांचवी बार रक्तदान किया। चौथा डोनेशन राकेश कुमार आर्य ने किया वे सिक्योरिटी गार्ड मैनेजर है ।इन सभी ने जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एबी नेगेटिव रक्त समूह 0.5 प्रतिशत लोगों में ही पाया जाता है, जिसके कारण आपात स्थिति में इसकी उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को तुरंत एबी नेगेटिव रक्त की आवश्यकता थी। परिजनों द्वारा कई जगह संपर्क करने के बावजूद रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। ऐसे में टीम जीवनदाता ही एक बार फिर लोगों के लिए जीवनदायी बनी। रक्त मिलने के बाद ही परिजनों ने राहत की सांस ली। यह घटनाएं एक बार फिर यह संदेश देती है कि रक्तदान महादान है और समय पर किया गया यह कार्य किसी के जीवन की डोर को टूटने से बचा सकता है।सभी को अपना ब्लड ग्रुप कराना चाहिए ।






