भारत सिंह चौहान
कोटा/सुल्तानपुर। सुल्तानपुर ब्लॉक के गांव बंबोरी का माहौल उस समय पूरी तरह बदल गया, जब छोटे-छोटे बच्चों की मुस्कान, ढोल की थाप और “हर बच्चा स्कूल में” जैसे नारों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को शिक्षा के रंग में रंग दिया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड जिला कोटा की पहल पर शिक्षा विभाग कर्मचारी गण सहकारी सभा 696 आर कोटा-बारां एवं स्काउट गाइड स्थानीय संघ सुल्तानपुर के संयुक्त तत्वाधान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बंबोरी में आयोजित ब्लॉक स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम न केवल एक आयोजन रहा, बल्कि यह शिक्षा के प्रति जन-जागरूकता का जीवंत अभियान बनकर सामने आया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्काउट गाइड के कोटा जिला प्रधान एवं शिक्षा सहकारी के अध्यक्ष प्रकाश जायसवाल थे कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुल्तानपुर श्रीमती गायत्री मीणा ने की। विशिष्ट अतिथियों में जमनालाल गुर्जर, बृज सुंदर मीणा, कमल कुमार शर्मा, अनुराधा शर्मा एवं शिवराज गोचर की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत स्वागत से हुआ, जब प्रधानाचार्य महावीर मीणा एवं स्थानीय संघ सचिव इंद्रराज दाधीच ने अतिथियों का तिलक, अक्षत एवं माल्यार्पण कर आत्मीय अभिनंदन किया। यह दृश्य केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और शिक्षा के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। इससे पूर्व गेट पर स्काउट गाइड बच्चों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
मंच पर जब बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, तो ऐसा लगा मानो उनकी हर प्रस्तुति शिक्षा के महत्व को शब्दों से ज्यादा प्रभावी ढंग से व्यक्त कर रही हो। देशभक्ति गीतों और प्रेरणादायक नृत्यों के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा ही वह दीपक है, जो जीवन के अंधकार को दूर कर सकता है। प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया, जिससे उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था।
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था, जब प्रतिभावान छात्र-छात्राओं एवं नवप्रवेशित बालक-बालिकाओं का तिलक लगाकर और माला पहनाकर स्वागत किया गया। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर मासूम खुशी और उनके अभिभावकों की आंखों में उम्मीद की चमक इस बात का संकेत दे रही थी कि यह केवल प्रवेश नहीं, बल्कि एक नए भविष्य की शुरुआत है।
इसके बाद निकली प्रवेशोत्सव रैली ने पूरे गांव को शिक्षा के संदेश से सराबोर कर दिया। ढोल की थाप पर कदम से कदम मिलाते स्काउट-गाइड, छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण जब गांव की गलियों से गुजरे, तो हर कोई ठहरकर इस संदेश को सुनने लगा।
“खुशबू है हर फूल में—हर बच्चा स्कूल में”,
“रोटी दाल तरकारी—स्कूल अच्छा सरकारी”,
“सरकारी स्कूल में पढ़ने जाएंगे—जग में नाम कमाएंगे”,
“एक बेटी पढ़ेगी—सात पीढ़ी तरेगी”
जैसे नारों ने वातावरण को जीवंत और ऊर्जावान बना दिया।
रैली जब गांव के मुख्य चौराहे पर पहुंची, तो वहां नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए प्रकाश जायसवाल ने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “जब तक गांव का हर बच्चा स्कूल नहीं पहुंचेगा, तब तक हमारा विकास अधूरा रहेगा।” उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखें।
्प्रधानाचार्य महावीर मीणा ने भी अपने उद्बोधन में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालय आज संसाधनों, गुणवत्ता और समर्पण के मामले में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान यह साफ नजर आया कि शिक्षा अब केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप ले रही है। ग्रामीणों की सहभागिता, बच्चों का उत्साह और शिक्षकों का समर्पण इस बात का प्रमाण था कि जब समाज एकजुट होता है, तो परिवर्तन अवश्य आता है।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा और हर घर से बच्चों को विद्यालय भेजा जाएगा। बंबोरी का यह प्रवेशोत्सव कार्यक्रम न केवल एक आयोजन बनकर सीमित रहा, बल्कि यह शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बन गया।
इस पूरे आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि जब प्रयास सामूहिक हों और उद्देश्य स्पष्ट हो, तो शिक्षा की अलख हर दिल तक पहुंच सकती है। इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि कुंज बिहारी नागर एवं तुलसीराम सैनी, पुरुषोत्तम मालव के अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक एवं अभिभावक मौजूद थे।






