कोटा उज्जैन की पावन धरा से पधारीं अंतर्राष्ट्रीय भागवताचार्य आदरणीय दीदी श्रीजी के सानिध्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर आज कोटा का ‘गीता भवन’ गोकुल धाम बन गया। वीरांगना कन्या संस्कार केंद्र द्वारा आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में आज भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव (नंदोत्सव) अपार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, पूरा पांडाल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूँज उठा और श्रद्धालुओं ने झूमकर नृत्य किया।
विशिष्ट अतिथियों का हुआ भव्य स्वागत
आज के उत्सव में कला, चिकित्सा और समाज सेवा जगत की महान विभूतियों ने शिरकत की। आयोजन समिति द्वारा मुख्य अतिथियों का माला, साफ़ा और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
उस्ताद बालकृष्ण बरथुनिया:* (द्रोणाचार्य उस्ताद स्वर्गीय चौथमल जी के सुपुत्र), जिन्होंने अपनी गौरवशाली कला विरासत से समाज को गौरवान्वित किया है।
समाजसेवी अरुण भार्गव नागरिक सहकारी बैंक के पूर्व उपाध्यक्ष बाल कल्याण समिति न्याय पीठ के पूर्व अध्यक्ष व जाने-माने धर्म प्रेमी समाजसेवी ने व्यास पीठ की आरती करी।
डॉ. दुर्गा शंकर सैनी :* (राजस्थान डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध गांधीवादी समाजसेवी), जिनके सेवाभावी जीवन की दीदी श्रीजी ने भी सराहना की।
साध्वी प्रज्ञा भारती* भी नंदोत्सव कार्यक्रम में उपस्थित रही। अरुण साख़ला:* (विशिष्ट अतिथि एवं समाजसेवी), जिनकी उपस्थिति ने गरिमा बढ़ाई। दीदी श्रीजी का आह्वान: संस्कारों से सजाएं बचपन
कथा व्यास दीदी श्रीजी ने नृसिंह अवतार और वामन अवतार की व्याख्या करते हुए कृष्ण जन्म के आध्यात्मिक रहस्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि— “आज के युग में कान्हा जैसे पुत्र की कामना तब ही सार्थक है, जब हम अपनी बेटियों को ‘वीरांगना’ बनाने का संस्कार दें।” उन्होंने नशामुक्ति और जहरमुक्त खेती के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सात्विक अन्न और व्यसनमुक्त जीवन ही असली कृष्ण भक्ति है।
*कल का विशेष आकर्षण*
आयोजन समिति ने बताया कि कल पंचम दिवस पर भगवान की बाल लीलाओं और *छप्पन भोग (गोवर्धन पूजा)* का विशेष प्रसंग सुनाया जाएगा। आज के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तगण, युवा और मातृशक्ति उपस्थित रही, जिन्होंने पुष्प वर्षा और गुलाल के बीच जन्मोत्सव का आनंद लिया।






