Wednesday, February 25, 2026
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कोटा में दो-दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण सम्पन्न,40 युवा प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया

दो-दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण सम्पन्न

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन पर 02 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन 22 फरवरी से 23 फरवरी  तक कृषि अनुसंधान केंद्र, उम्मेदगंज, कोटा में किया गया। इस प्रशिक्षण में कोटा एवं बूंदी जिले के 40 युवा प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं में मधुमक्खी पालन के प्रति दक्षता विकसित कर उन्हें रोजगारोन्मुख बनाना था, जिससे वे मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु महोदया डॉ. विमला डूंकवाल ने बताया कि स्वयं सहायता समूह बनाकर मधुमक्खी पालन एवं शहद प्रसंस्करण के माध्यम से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इस दौरान डॉ. एम.सी. जैन, निदेशक अनुसंधान ने कहा कि मधुमक्खी पालन एक नवोन्मेषी व्यवसाय है, जिसे अपनाकर अपनी आय बढ़ाई जा सकती है। डॉ. बी.एस. मीणा, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान, कृषि अनुसंधान केंद्र, कोटा ने क्षेत्रीय स्तर पर मधुमक्खी पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. आर. के. बैरवा ने मंच संचालन करते हुए फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मधुमक्खियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कृषि अनुसंधान केंद्र, उम्मेदगंज, कोटा के मधुमक्खी पालन परियोजना प्रभारी डॉ. हरिप्रसाद मेघवाल ने बताया कि भूमिहीन कृषक भी मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खी पालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, जिनमें मधुमक्खी की प्रमुख प्रजातियाँ, विशेषताएँ एवं जीवन चक्र, मधुमक्खी पालन की उपयोगिता एवं आर्थिक महत्व, आवश्यक उपकरण एवं औजार, कॉलोनी विभाजन, रोबिंग की समस्या एवं उसके समाधान, प्रतिकूल परिस्थितियों में मधुमक्खियों की देखभाल, माइग्रेशन की जानकारी, मधुमक्खी पालन से प्राप्त विभिन्न उत्पादों का महत्व, पराग एवं मकरंद की कमी की स्थिति में कृत्रिम आहार, स्वार्मिंग रोकने के उपाय, सावधानियाँ, शहद निष्कर्षण एवं प्रोसेसिंग संबंधी सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी शामिल रही। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. एम.सी. जैन द्वारा उद्यानिकी फसलों की उत्पादन वृद्धि में मधुमक्खियों के योगदान, डॉ. बी.एस. मीणा द्वारा शहद उत्पादन हेतु सरसों उत्पादन की उन्नत तकनीक, डॉ. बी.एल. ढाका ने शहद एवं अन्य उत्पादो के विपणन की रणनीति, डॉ. टी.सी. वर्मा द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों में मधुमक्खियों की देखभाल, डॉ. आर. के. बैरवा द्वारा कृषि उत्पादन बढ़ाने में मधुमक्खियों की भूमिका, डॉ. बी. के. पाटीदार द्वारा मधुमक्खियों के रोग एवं शत्रुओं की पहचान एवं प्रबंधन तथा डॉ. ज्योति कंवर द्वारा मकरंद उपलब्ध कराने वाली उद्यानिकी फसलों की जानकारी एवं प्रबंधन विषयों पर व्याख्यान दिए गए। प्रगतिशील कृषक श्री युधिष्ठिर चौदसी ने समूह बनाकर मधुमक्खी पालन को आजीविका का सशक्त साधन बनाने पर बल दिया। समापन अवसर पर डॉ. एम.सी. जैन ने उपस्थित होकर सभी प्रतिभागियों को शहद भंडारण के लिए स्टील की टंकियां वितरित कीं। इस अवसर पर केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. ज्योति कंवर ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया टाइटल साथ न्यूज़ तैयार करें

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