Saturday, February 21, 2026
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Double Al’ का शंखनाद: ‘Aspirational India’ की डिजिटल संप्रभुता का वैश्विक उदय

✍️डॉ. नयन प्रकाश गांधी

“दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये।

विस्मयों न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”

अर्थात दान, तप, शुचिता, विज्ञान और नीति के क्षेत्र में विस्मय नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह धरती बहुत से रत्नों से भरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी प्राचीन भारतीय दर्शन के साथ दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का शंखनाद किया है। यह आयोजन केवल एक तकनीकी प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि 1.4 बिलियन भारतीयों की सामूहिक शक्ति और डिजिटल संप्रभुता का वैश्विक घोषणापत्र है।

भारत का बड़ा दिनः लंदन, सियोल और पेरिस के बाद अब नई दिल्ली

एआई के वैश्विक सफर में आज का दिन भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। अब तक दुनिया ने केवल तीन बड़े वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन देखे थे, और अब भारत इस विशिष्ट क्लब का नेतृत्व कर रहा है:

ब्लेचली पार्क, लंदन (यूके) नवंबर 2023: यह विश्व का पहला ‘एआई सेफ्टी समिट’ था, जहाँ ऐतिहासिक ‘ब्लेचली घोषणा’ पर हस्ताक्षर कर एआई के जोखिमों पर वैश्विक सहमति बनी।

सियोल (दक्षिण कोरिया) मई 2024: यह दूसरा शिखर सम्मेलन था, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ ‘इनोवेशन और समावेशिता’ को केंद्र में रखा गया।

पेरिस (फ्रांस)- फरवरी 2025: इसे ‘एआई एक्शन समिट’ का नाम दिया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की, जो भारत की बढ़ती साख का प्रमाण था।

नई दिल्ली (भारत) – फरवरी 2026: अब भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। यह इस वैश्विक कड़ी का चौथा और सबसे बड़ा आयोजन है, जो मशीनी दिमाग के बजाय मानव-केंद्रित प्रगति’ पर केंद्रित है।

एआई के वैश्विक सफर में आज का दिन भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। एआई गवर्नेस की जो वैश्विक यात्रा नवंबर 2023 में लंदन के ब्लेचली पार्क (यूके) से शुरू हुई थी, जहाँ पहली बार ‘एआई सेपटी’ पर दुनिया एकजुट हुई थी, वह अब अपने निर्णायक पड़ाव पर है। इसके बाद मई 2024 में सियोल (दक्षिण कोरिया) ने नवाचार और समावेशिता का संदेश दिया और फरवरी 2025 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ‘एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की थी। आज नई दिल्ली में आयोजित यह समिट न केवल इस वैश्विक कड़ी का चौथा स्तंभ है, बल्कि यह दुनिया को संदेश देता है कि अब एआई का केंद्र सिलिकॉन वैली से खिसक कर ‘भारत मंडपम’ की ओर आ गया है। जहाँ पिछले सम्मेलनों का जोर केवल मशीनी सुरक्षा पर था, वहीं भारत का यह समिट एआई के मानवीय प्रभाव और लोकतंत्रीकरण पर केंद्रित है।

‘Double Al’ और ‘Aspirational India’ का संगम

प्रधानमंत्री मोदी ने इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से दुनिया को ‘Double Al’ का एक अनूठा सूत्र दिया है। यहाँ ‘Double Al’ का अर्थ है- Artificial Intelligence + Aspirational India। प्रधानमंत्री का मानना है कि जब दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक (AI) भारत के 1.4 बिलियन लोगों की आकांक्षाओं (Aspirational India) से मिलती है, तो प्रगति की गति कई गुना बढ़ जाती है। भारत एआई का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता है। यह

विजन ‘सबका साथ, सबका विकास’ को डिजिटल युग में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के रूप में परिभाषित करता है।

BharatGen’: डिजिटल गुलामी से मुक्ति का स्वदेशी शस्त्र

इस समिट का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित पहला सरकारी और स्वदेशी एआई मॉडल ‘BharatGen’ (भारत-जैन) है।

अपनी भाषा, अपना गौरवः आईआईटी बॉम्बे और India AI मिशन’ के तहत तैयार यह मॉडल हिंदी, तमिल, राजस्थानी सहित 22 भारतीय भाषाओं की बारीकियों को समझता है। यह सुनिश्चित करेगा कि जैसलमेर का किसान अपनी मातृभाषा में एआई से संवाद कर सके।

डेटा संप्रभुताः प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि ‘जिसका डेटा, उसका भविष्य।” ‘Bharat Gen’ यह सुनिश्चित करता है कि भारतीयों का डेटा विदेशी सर्वरों पर नहीं, बल्कि देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहे। यह केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि डिजिटल गुलामी से ‘डिजिटल आजादी’ की ओर भारत का सबसे बड़ा कदम है।

मरुधरा का डिजिटल कायाकल्पः राजस्थान के विशेष संदर्भ में

राजस्थान के लिए एआई केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि भौगोलिक विषमताओं का समाधान है। ‘BharatGen’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह हमारी मारवाड़ी, मेवाती, हाड़ौती और ढूंढाड़ी जैसी बोलियों के लहजे को समझेगा।

कृषि क्रांतिः एआई आधारित सेंसर अब राजस्थान के बाजरा और सरसों के किसानों को सिंचाई का सटीक समय बताएंगे।

कारीगरों को वैश्विक मंचः जोधपुर के हस्तशिल्प और जयपुर की ब्लू पॉटरी के कारीगर अब एआई के जरिए अंतरराष्ट्रीय डिजाइन ट्रेंड्स को समझकर सीधे विदेशी बाजारों से जुड़ सकेंगे।

कोर्डिंग में करुणा और हुनर को पंख

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने इस आयोजन में यह प्रमाणित किया है कि एआई रोजगार छीनने वाला ‘भक्षक’ नहीं, बल्कि स्किल मल्टीप्लायर (कौशल संवर्धक) है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का युवा अब एआई की मदद से वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। स्वास्थ्य सेवा में सटीक निदान से लेकर ‘भाषिणी के जरिए भाषाई बाधाओं को खत्म करने तक, एआई अब भारत के विकास का ‘जीपीएस’ बन चुका है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ भारत के लिए महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत @2047′ के संकल्प की जीवंत झांकी है। यह सिद्ध करता है कि भारत का ‘डिजिटल इंडिया’ अब ‘समझदार और संवेदनशील भारत’ बन चुका है, जहाँ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के पीछे सिर्फ गणित नहीं, बल्कि गरीब के कल्याण की ममता है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया-प्रौद्योगिकी केवल विकास का जरिया नहीं, बल्कि लोक-कल्याण का सबसे बड़ा मार्ग है। इसी मंगल कामना के साथ, भारत का यह तकनीकी उदय पूरी मानवता के लिए एक प्रगतिशील और अवसर-उन्मुख भविष्य की नींव रख रहा है। प्रधानमंत्री का ‘Double Al’ मंत्र मरुधरा की वीरता और आधुनिक विज्ञान का मेल है। अब राजस्थान की ‘लखपति दीदियाँ एआई का हाथ थामकर अपने हुनर को सात समंदर पार पहुँचाएंगी। भारत मंडपम से गूँजा यह शंखनाद सिद्ध करता है कि भारत का तकनीकी भविष्य जितना आधुनिक है, उसकी जड़ें उतनी ही हमारी मिट्टी और संस्कृति में गहरी हैं। इसी मंगल कामना के साथ, भारत का यह तकनीकी उदय मानवता और विशेष रूप से हमारे ग्रामीण अंचल के कल्याण का नया मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

✍️डॉ. नयन प्रकाश गांधी

(युवा प्रबंधन विश्लेषक एवं पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट)

 

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