Saturday, April 18, 2026
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नवजातों की जिंदगी बचाने की पहल: बाल कल्याण समिति का ‘फेंके नहीं, हमें दें’ अभियान शुरू

जयपुर/ नवजात शिशुओं को असुरक्षित रूप से छोड़ने की घटनाओं पर रोक लगाने और उन्हें सुरक्षित भविष्य देने के उद्देश्य से बाल कल्याण समिति द्वारा ‘फेंके नहीं, हमें दें’ अभियान चलाया जाएगा। बुधवार को इस मानवीय अभियान के पोस्टर का विमोचन केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल एवं बीकानेर पश्चिम विधायक श्री जेठानंद व्यास ने किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नवजात बच्चों को लावारिस छोड़ने के बजाय सरकारी आश्रय गृहों, पालना गृहों अथवा रक्षा घरों में सुरक्षित रूप से सौंपने के लिए समाज में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं को असुरक्षित स्थिति में छोड़ना न केवल अमानवीय है, बल्कि अपराध भी है। बाल कल्याण समिति को निचले स्तर तक इस अभियान को पहुंचाकर कानून सम्मत तरीकों से बच्चों को संरक्षित करने के प्रयास करने चाहिए।

बीकानेर पश्चिम विधायक  जेठानंद व्यास ने कहा कि कई बार माता-पिता या परिजन नवजात बच्चों को असंवेदनशील तरीके से छोड़ देते हैं, जिससे बच्चे गंभीर रूप से शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं और उनका दत्तक ग्रहण भी संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि पालना गृह सहित अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं और ऐसे कृत्यों पर होने वाली कानूनी कार्यवाही की जानकारी भी आमजन तक पहुंचाई जानी चाहिए।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष  जुगल किशोर व्यास ने बताया कि यह अभियान झाड़ियों, नालों एवं असुरक्षित स्थानों पर फेंके गए नवजात शिशुओं की रक्षा, आश्रय और संरक्षण के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में जोधपुर, पाली, जयपुर, झालावाड़, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित कई स्थानों पर इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, वहीं बीकानेर में भी एक-दो मामले देखने को मिले हैं। कई बार असुरक्षित रूप से छोड़े गए बच्चों की मृत्यु तक हो जाती है, जो मानवता को शर्मसार करता है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को सुरक्षित कर दत्तक प्रक्रिया से जोड़ना है। इसके तहत बीकानेर जिले के पीबीएम अस्पताल एवं जिला अस्पताल में पोस्टर लगाए जाएंगे और ग्राम पंचायत स्तर तक जागरूकता फैलाई जाएगी।

बाल कल्याण समिति के सदस्य  जन्मेजय व्यास ने कहा कि जानकारी के अभाव में लोग यह समझते हैं कि नवजात शिशु सौंपने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी, इसी डर से वे बच्चों को असुरक्षित रूप से छोड़ देते हैं। जबकि यदि शिशु को पालना गृह, बाल कल्याण समिति या दत्तक ग्रहण एजेंसी को सौंपा जाता है तो कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती और शिशु सुरक्षित रहता है।

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरुण सिंह शेखावत ने अभिभावकों से अपील की कि वे अनचाहे शिशुओं को उचित एवं सुरक्षित स्थानों पर रखें या बाल कल्याण समिति, दत्तक ग्रहण एजेंसी अथवा बाल अधिकारिता विभाग को सौंपें।वहीं किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य अरविंद सिंह सेंगर ने बोर्ड से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी।

यह अभियान नवजातों के जीवन की रक्षा और समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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