कोटा । प्रसिद्ध सूफ़ी संत हज़रत सैय्यद जमालुद्दीन शाह उर्फ़ मिल वाले बाबा रहमतुल्लाह अलेह का तीन दिवसीय उर्स परम्परागत अकीदत और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हो गया।
उर्स के समापन पर दरगाह परिसर में कुल की रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर बाबा की बारगाह में दुआएँ मांगीं।

कोटा दरगाह कमेटी के संरक्षक अब्दुल सलाम अंसारी ने बताया कि उर्स के दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक एवं समाजसेवा से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। दरगाह सदर अतीक़ ख़ान के साथ मिलकर उन्होंने जानकारी दी कि दरगाह परिसर में निर्मित सर्वधर्म चिकित्सा डिस्पेंसरी का उद्घाटन किया गया, जिसका उद्देश्य सभी धर्मों के जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

उर्स के दूसरे दिन 15 जनवरी की रात 11 बजे आयोजित महफ़िल-ए-जमाल में हिंदुस्तान के मशहूर कव्वाल जौहजेब निज़ामी एवं मसूद निज़ामी ने “मेरा ख़्वाजा बादशाह” सहित कई प्रसिद्ध कलाम पेश किए। कव्वाली की मधुर प्रस्तुतियों ने समूचे माहौल को रूहानियत से सराबोर कर दिया और देर रात तक श्रोता झूमते रहे।
उर्स के दौरान दरगाह कमेटी की ओर से समाजसेवा के तहत दो गरीब लड़कियों के निकाह सम्पन्न कराए गए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नियाज़ अहमद निक्कू भाई, मोहम्मद मियां साहब, हाजी मोईन निज़ाम साहब, हज़रत मौलाना रौनक अली अश्फ़ाकी, शाहिद मुल्तानी, रफ़ीक भाई, दानिश भाई, नईमुद्दीन अपोलो सहित अन्य गणमान्य लोगों ने दूल्हा-दुल्हन को मुबारकबाद दी और उनके सिर पर हाथ रखकर दुआएँ कीं।
इसके अतिरिक्त हाजी मोहम्मद मियां साहब की जानिब से मदरसा के बच्चों को उनके हाथों से कपड़ों की एक-एक जोड़ी वितरित की गई। दरगाह कमेटी द्वारा उर्स के तीनों दिन प्रतिदिन लगभग 10,000 लोगों को लंगर कराया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
उर्स के अंतिम दिन सुबह 5 बजे कुल की रस्म के साथ उर्स का विधिवत समापन हुआ। इस मौके पर सदर आरिफ़ ख़ान, सदर अतीक़ ख़ान, मोहम्मद शाहिद पठान, जफ़र भाई ठेकेदार, मुन्ना भाई खिरनी, गुड्डू धनवां, इस्लाम ख़ान सहित बड़ी संख्या में सेवादार एवं अकीदतमंद मौजूद रहे।
दरगाह संरक्षक अब्दुल सलाम अंसारी द्वारा किए गए बेहतरीन इंतज़ामात की सभी ने सराहना की। उर्स के माध्यम से भाईचारे, इंसानियत और सूफ़ी परम्परा का संदेश एक बार फिर कोटा शहर में गूंज उठा।






