Wednesday, July 29, 2026
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श्रीरामकथा में जटायु, शबरी और सुग्रीव प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन

कोटा। राधारानी पार्क, रंगबाड़ी योजना सेक्टर-4 में चल रही श्रीरामकथा के सातवें दिन कथा पंडाल में श्रद्धा, करुणा और वीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीकामखेड़ा बालाजी के पुजारी पंडित तुलसीराम शर्मा ने गिद्धराज जटायु के दिव्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

कथा वाचन के दौरान पंडित तुलसीराम शर्मा ने बताया कि जब रावण माता सीता का अपहरण कर आकाश मार्ग से ले जा रहा था, तब जटायु महाराज ने उसे ललकारते हुए माता सीता को मुक्त कराने का भरसक प्रयास किया। अहंकार में डूबे रावण ने जटायु के पंख काट दिए, जिससे वे धरती पर गिर पड़े और “हे राम, हे राम” का स्मरण करते रहे। जटायु ने प्रभु श्रीराम को माता सीता के अपहरण का वृत्तांत सुनाया। कथा वाचक ने कहा कि प्रभु श्रीराम की करुणा ऐसी थी कि उन्होंने जटायु को वह दुर्लभ गति प्रदान की, जिसकी कामना योगिजन भी करते हैं।

मंच संचालन करते हुए कृष्णार्थी राकेश विजयवर्गीय ने कहा कि जिनके मन में परहित की भावना होती है, उनके लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। उन्होंने अधर्म, अन्याय और अनीति के विरोध का संदेश देते हुए कहा कि जो इन्हें देखकर भी मौन रहते हैं, वे अभागे होते हैं। उन्होंने महाभारत के भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए धर्म के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा दी।

कथा के दौरान शिक्षा मंत्री के आगमन पर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रीराम के विचार ही विश्व में शांति की स्थापना कर सकते हैं। कथा में सुग्रीव-राम मैत्री और शबरी की कुटिया में प्रभु श्रीराम के आगमन का प्रसंग भी भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कोटा दशहरा मेला अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने भी व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

 

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