बिरला जी की प्रेरणा से रक्तदान का सैलाब – कोटा-बूंदी हाड़ौती युवाओं का रक्त बहेगा जरूरतमंद रोगियों की धमनियों में!
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सेवार्थियों का दान बनेगा जीवनरक्षक – 200+ शिविरों में उमड़ी जनता की लहर
रक्तदान महादान: ओम बिरला के जन्मदिवस पर कोटा-बूंदी में जनसेवा का विराट संगम
✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी ,युवा मैनेजमेंट विश्लेषक
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के जन्मदिवस पर 4 दिसंबर गुरुवार को कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में अभूतपूर्व स्तर पर रक्तदान शिविरों और जनसेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। व्यक्तिगत उत्सव को सार्वजनिक सेवा में बदलने वाली इस परंपरा ने आम जन, युवाओं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को एक सूत्र में बांध दिया। कोटा-बूंदी में एक साथ 200 से अधिक स्थानों पर विशाल रक्तदान शिविर लगाए गए, जिनमें सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में युवाओं, नागरिकों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने स्वैच्छा से रक्तदान किया।

कोटा शहर में सेवा की लहर
कोटा शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र कुल मिलाकर सैकड़ों स्थानों पर विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में भाजपा कार्यकर्ताओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और टीम ओम बिरला के स्वयंसेवकों ने स्वयं रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया। सोशल मीडिया के माध्यम से किए गए आह्वान के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं और प्रथमबार रक्तदान करने वाले स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

बूंदी व हाड़ौती क्षेत्र की व्यापक भागीदारी
केवल कोटा शहर ही नहीं, बल्कि बूंदी व पूरे हाड़ौती क्षेत्र के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी रक्तदान शिविरों और सेवा कार्यक्रमों की व्यापक श्रृंखला देखने को मिली। कोटा एवं बूंदी क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर रक्तदान दर्ज होने के प्रयासों के साथ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिकित्सा कर्मियों और युवाओं ने अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया। इस दौरान कई स्थानों पर रक्तदान के साथ-साथ निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, दवाइयों का वितरण और अन्य सेवा गतिविधियां भी चलाई गईं।

बहुआयामी जनसेवा का संकल्प
रक्तदान शिविरों के समानांतर कोटा-बूंदी क्षेत्र में निःशुल्क मल्टी-स्पेशलिटी चिकित्सा शिविर, जरूरतमंदों को वस्त्र एवं कंबल वितरण, भोजन सेवा, गौसेवा तथा पौधरोपण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। बूंदी जिले में ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘दादी-नानी की डिजिटल पाठशाला’ जैसी पहल की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य वरिष्ठ महिलाओं को डिजिटल साक्षरता से जोड़कर उनके दैनिक जीवन को सरल और सशक्त बनाना है। इन गतिविधियों ने जन्मदिवस को केवल महोत्सव नहीं, बल्कि समाज सुधार और मानवता के उत्थान की दिशा में ठोस कदम में बदल दिया।युवा मैनेजमेंट विश्लेषक डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि माननीय लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला की लोकप्रियता नेतृत्व शैली का इसी से दृष्टिगत हो गया है कि उनके इस जन्मदिवस सेवा महोत्सव में भारतीय जनता पार्टी के कोटा-बूंदी ही नहीं अपितु हाड़ौती के अधिकतर क्षेत्र में शहर से लेकर देहात और मंडल स्तर तक हर जमीनी कार्यकर्ताओं ने एक साथ एक स्वर में बेहतरीन कार्य किया ,जहां कोटा शहर, कोटा देहात और बूंदी ज़िला इकाइयों के अध्यक्षों के नेतृत्व की एवं उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर कार्य करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की उनके एकीकृत समर्पण की झलक इस पूरे रक्तदान ,सेवा शिविरों के कार्यक्रम की सफलता से दृष्टिगत होती है।

तीन दशकों से अधिक समय से राजनीति के मैदान में सक्रिय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा जनसेवा को सर्वोपरि रखा है। 1990 के दशक से कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र की धरती पर उन्होंने स्थानीय निकाय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी यात्रा तय की है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि लोकसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामय पद पर आसीन होंने के बावजूद उनका दिल कोटा बूंदी की जनता में ही बसता है ,जो वह अपने कई बार व्यक्तव्य में कह चुके है ,उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्योंनूरूप बेहतरीन कार्य शैली ,महत्वपूर्ण मुद्दों पर त्वरित निर्णय एवं जनसेवा को अपने जीवन कार्यशैली में समाहित कर लिया है। उनके जीवन का हर पल जनहित, विकास और मानवता की सेवा में समर्पित रहा है। इस लंबे सफर में उन्होंने सिद्ध कर दिया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो सत्ता के पीछे नहीं, बल्कि सेवा के पुजारी बनकर जनता के हृदय में विराजमान हो।

उनके इस जन्मदिवस पर कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में 200 से अधिक स्थानों पर एक साथ लगे रक्तदान शिविर उनके प्रति शहरी-ग्रामीण, देहाती वासियों और आम जनमानस का अपार स्नेह एवं जुड़ाव दर्शाते हैं। शहर के तंग गलियारों से लेकर ग्रामीण अंचलों के खेत-खलिहानों तक, हर वर्ग के लोग सेवा के इस संकल्प में सहभागी बने।
शिविरों के माध्यम से संग्रहित हजारों यूनिट रक्त, कोटा मेडिकल कॉलेज, एमबीएस हॉस्पिटल सहित प्रदेश के अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायी सिद्ध होगा। उनके जन्मदिवस पर आयोजित इस सेवा अभियान ने यह संदेश दिया कि सच्ची राजनीति और नेतृत्व का सार जनसेवा और मानवता की रक्षा में निहित है। जब कोई सार्वजनिक प्रतिनिधि अपने जन्मदिन को भव्य आयोजन के बजाय रक्तदान, स्वास्थ्य सेवा और कमजोर वर्गों की मदद जैसे कार्यों के लिए समर्पित करता है, तो वह समाज को संवेदना, करुणा और उत्तरदायित्व की नई दिशा दिखाता है। कोटा-बूंदी में चार दिसंबर का दिन उन हजारों दाताओं की धड़कनों में दर्ज हो गया, जिन्होंने किसी अनजाने मरीज की जिंदगी बचाने के लिए अपना रक्त समर्पित कर यह साबित किया कि “रक्तदान ही सच्चा महादान है।






