कोटा/ विश्व प्रदूषण निवारण दिवस पर कबीर पारख संस्थान में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में संत, चिकित्सक, साहित्यकार तथा प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया, विचार प्रकट करते हुए प्रकृति में बढते मानवीय हस्तक्षेप के परिणाम स्वरूप पर्यावरण पर पडते प्रतिकूल प्रभाव पर चिंता व्यक्त की तथा इस पर नियंत्रण करने के लिए जागरुकता तथा नागरिक कृत्व्यों का निर्वहन की जरूरत पर बल दिया। अध्यक्षता कर रहे संत प्रभाकर साहेब ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण गम्भीर समस्या बनती जा रही है। प्रकृति द्वारा प्रदत पंच महाभूतों को शुद्ध रखकर ही जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। अनावश्यक दिखावे की प्रवृत्ति को उन्होंने मनुष्य बताया और कहा हम आनंद के अवसर में दु:खो को निमंत्रण क्यों देते हैं अनावश्यक आतिशबाजी, कनफोडू डी जे, आदि के बिना भी आयोजन किये जा सकते हैं। जीवन में जितनी सात्विकता होगी उतनी ही खुशहाली होगी।
डॉ. शिव लहरी ने कहा कि निहित स्वार्थ की भावन से ऊपर उठकर सभी के लिए सोंचना होगा। आज पलास्टिक का उपयोग इतना बढता जा रहा है कि जन्मते बच्चे के रक्त में पलास्टिक के कणों की मोजूदगी मिली है अगर पलास्टिक पर पूर्ण प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया तो अगामी वर्षों में प्लास्टियोसिस नई बीमारी देखने को मिलेगी।
कवि रूपनारायण शर्मा ने कहा कि जिस गौ को माता का दर्जा देते पलास्टिक के ढेर पर खड़े होकर वह क्या आशीर्वाद देगी। जैसे भंवरा मधुमक्खी फूलों को नुकसान पहुंचा बिना शहद ग्रहण कर लेती है वैसे ही हमें पर्यावरण को सुरक्षित रखकर उसमें जीना होगा।
संत गुरुबोध ने कहा पर्यावरण प्रदूषण से निजात पाने के लिए वैचारिक प्रदुषण पर पार पाना होगा। स्वस्थ रहने के लिए समाज में मांसाहार का प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है जबकि शाकाहार प्रकृति, संस्कृति व स्वास्थ्य सबके लिए लाभप्रद है आज दुनिया के बड़े लोग शाकाहार की और लौट रहे हैं।
साहित्यकार गौरस प्रचंड, संत सुबोध दास, कवि बंटी सुमन आदि ने कविताओं के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण से निजात पाने के लिए वृक्षारोपण, संयमित जीवन चर्या, व पारमार्थिक सोंच को विकसित करने की सीख दी।
डॉ. राम शर्मा ने कार्यक्रम संचालन किया, रामभरोस नागर ने संस्थान की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया।
पंच भूतों की शुद्धता से जीवन आबाद होगा- संत प्रभाकर साहेब






