रिपोर्ट – के. डी. अब्बासी
कोटा। पत्रकारों के लिए शुरू की गई “पत्रकार आवासीय योजना चन्द्रेसल रोड” को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी पत्रकारों की उम्मीदें अधूरी हैं। 3 अक्टूबर 2023 को आवेदन की अंतिम तिथि थी, और आज 21 अक्टूबर 2025 तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस योजना में आवेदन करने वाले पत्रकारों ने ₹72,000 तक की राशि जमा कर रखी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें भूखण्ड मिलेंगे या नहीं। पत्रकारों का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने उनके साथ वादाखिलाफी की है — अगर आवासीय भूखण्ड देने की नीयत थी तो योजना को चुनाव से ठीक पहले क्यों लॉन्च किया गया?
वर्तमान सरकार ने भी अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। कोटा के प्रमुख पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों के प्रयास भी नाकाम रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी पत्रकारों को उम्मीद थी कि वे इस दिशा में पहल करेंगे, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
नगर विकास न्यास की पुस्तिका के अनुसार:
नगर विकास न्यास कोटा ने पत्रकारों की लगातार मांग को देखते हुए चन्द्रेसल रोड स्थित क्षेत्र में कुल 80 भूखण्डों को लॉटरी के माध्यम से आवंटित करने का निर्णय लिया था। इन भूखण्डों को सड़क, पानी, बिजली और सीवरेज जैसी सुविधाओं से युक्त बताया गया था। न्यास का कहना है कि पत्रकार संघों को आवेदन पुस्तिका का अध्ययन कर योजना का लाभ उठाना चाहिए।
🔹 लेकिन हकीकत यह है कि —
दो साल बाद भी न तो लॉटरी प्रक्रिया पूरी हुई, न ही किसी को भूखण्ड आवंटित किया गया। पत्रकारों की यह आशा अब निराशा में बदल चुकी है।
👉 सवाल अब यह है —
क्या कोटा के पत्रकारों को उनका “अपना घर” मिलने का सपना कभी पूरा हो पाएगा, या यह योजना भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?






