राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे 79 वा स्वतन्त्रता दिवस समारोह का आयोजन किया गया जिसमे मुख्य अतिथि डा नितिन शर्मा फिजिओथेरेपिस्ट , अध्यक्षता रमेश चौहान पर्यावरणविद तथा विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता नरेंद्र शर्मा गेस्ट ऑफ ऑनर मधुसूदन शर्मा पुस्तकालय अध्यक्ष गीतांजली मेडीकल कॉलेज कोटा ने की | मंच संचालन वयोवृद्ध पाठक के.बी. दीक्षित ने किया | कार्यक्रम प्रबंधन अजय सक्सेना , रोहित नामा एवं राम निवास धाकड़ ने किया | गार्ड ऑफ ऑनर यतिश सक्सेना एवं छीतर लाल ने किया | इस अवसर पर पुस्तकालय की सेयावमे समर्पित गृह रक्षा स्वयसेवकों एवं रात्रिकालीन चोकीदार – समेत श्रेष्ठ पुस्तकालय कर्मियों का सम्मान किया गया | ध्वजारोहण मुख्य अतिथि डा नितिन शर्मा द्वारा किया गया |
डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव (संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं नोडल अधिकारी, सार्वजनिक पुस्तकालय, कोटा) ने उद्घाटन संबोधन में कहा – “स्वतंत्रता दिवस केवल झंडा फहराने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन का अवसर है कि हम स्वतंत्र भारत के नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कितनी ईमानदारी से कर रहे हैं। पुस्तकालय सदैव जन-जागरण, शिक्षा और सांस्कृतिक विकास का केंद्र रहा है, और हमें इसे नई पीढ़ी के लिए और भी सशक्त बनाना होगा।”
इस समारोह को संबोधित करते हुये डा नितिन ने कहा कि – आज के समय में हम अपने अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन कर्तव्यों को प्रायः भूल जाते हैं। एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए नागरिकों को पहले अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। स्वस्थ शरीर और जागरूक मन ही राष्ट्र की सच्ची शक्ति हैं।
अध्यक्षता कर रहे रमेश चौहान ने कहा – “स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आज़ादी नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं की रक्षा का भी दायित्व है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और शिक्षित भारत छोड़ना होगा।”
विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता नरेंद्र शर्मा ने कहा – “कानून और संविधान हमें समान अधिकार देते हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब हर नागरिक अपने दायित्वों को समझे और निभाए। पुस्तकालय समाज में न्याय, समानता और शिक्षा का सशक्त माध्यम हैं।”
गेस्ट ऑफ ऑनर मधुसूदन शर्मा ने कहा – “पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं, बल्कि यह विचारों का संगम है। यहां आने वाला हर पाठक ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना भी प्राप्त करता है।”
समारोह में देशभक्ति गीत, कविताएं और विचार-विमर्श के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, और सभी ने एक समृद्ध, सशक्त और ज्ञान-आधारित भारत के निर्माण का संकल्प लिया।






