गीत – आज हम आजाद हैं
रघुराज सिंह कर्मयोगी
आज हम आजाद हैं,शहद सा घुलता कानों में।
आजादी का राज छिपा है,वीरों के बलिदानों में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।
कारागार की काल कोठरी ,भूखे रातें काटी हैं।
चक्की पीसी,कोल्हू खींचे,सिर पर खाई लाठी हैं।
उत्तम संविधान अपनाया,शहद सा घुलता कानों मे।
आजादी का राज छिपा है ,वीरों के बलिदानों में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।
हम हैं वीर जवान हिंद के,शीश नहीं झुकने देंगे।
मुंडी काट हाथ में देंगे , देश नहीं बटने देंगे।
शक्तिपुंज भारत के बेटे,शहद सा घुलता कानों में।
आजादी का राज छिपा है, वीरों के बलिदान में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।
लहर लहर लहराए तिरंगा,भारत मां की शान रहे।
जोरावर , प्रताप, केसरी , पन्नालाल प्रतिमान रहे।
लाल किले से भाषण देना,शहद सा घुलता कानों में।
आजादी का राज छिपा है,वीरों के बलिदानों में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।
नेहरू, सुभाष और अंबेडकर, गांधी मान बढ़ाएं हैं।
चंद्रशेखर सुखदेब भगत सिंह अपने शीश चढ़ाए हैं।
कालाबादल,नयनू शर्मा,शहद सा घुलता कानों में।
आजादी का राज छिपा है,वीरों के बलिदानों में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।
अब ना कदम हटाएं पीछे, पाकिस्तान को रोदेंगे।
गलवन घाटी चीख रही हैं,कब्र चीन की खोदेंगे।
पूरा कश्मीर हमारा,लेंगे,शहद सा घुलता कानों में।
आजादी का राज छिपा है, वीरों के बलिदानों में।
वंदे मातरम,सत्यमेव जयते।






