कोटा। रेलवे माल डिब्बा मरम्मत कारखाना (वर्कशॉप) के वरिष्ठ खंड अभियंता (एसएससी) द्वारा एक ठेकेदार को 1 लाख 80 हजार रुपए का अनुचित लाभ पहुंचाने का मामला सामने आया है। केस दर्ज कर विजिलेंस मामले की जांच कर रही है।
एसएससी का नाम ब्रजराज मीना बताया जा रहा है। ब्रजराज ने यह कारनामा सेंटर रेलवे के भुसावल मंडल में तैनादगी के दौरान किया। यहां पर परिवहन सेवा अनुबंध के निष्पादन के लिए समग्र प्रभारी के रूप में काम करते हुए ब्रजराज के पास निजी फार्मो के ट्रैकों के जरिए रेलवे सामग्री को एक से दूसरी जगह पहुंचाने का काम था। टेंडर शर्तों के अनुसार ट्रक चलने के सबसे छोटे रूट के किलोमीटर के हिसाब से ठेकेदार को भुगतान किया जाना था। लेकिन ब्रजराज ने एक ठेकेदार के ट्रक को निर्धारित से अधिक चलना बताकर करीब 1 लाख 80 हजार रुपए का अधिक बिल पास करवा दिया। ठेकेदार का बिल बनाने के लिए ब्रजराज ने इंटरनेट और रोडमैप के साथ तय की गई दूरी की जांच ठीक से नहीं की।
विजिलेंस ने पकड़ी गलती
मामले की शिकायत मिलने पर सेंटर रेलवे विजिलेंस ने मामले की जांच शुरू की। इस जांच में विजिलेंस को ब्रजराज द्वारा किलोमीटर में की गई हेरा फेरी पकड़ में आ गई। अपनी कई पेज की रिपोर्ट में विजिलेंस ने ट्रैकों के विवरण सहित पूरे मामले का खुलासा किया।
कोटा आया ब्रजराज
लेकिन विजिलेंस द्वारा आरोप तय करने और कार्रवाई से पहले ही ब्रजराज ट्रांसफर लेकर कोटा वर्कशॉप आ गया। इसके बाद सेंटर रेलवे ने मामले की जांच पश्चिम-मध्य रेलवे विजिलेंस को सौंप दी। अब पश्चिम मध्य रेलवे विजिलेंस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। अब तक की जांच में विजिलेंस ने ब्रजराज को सत्यनिष्ठा, कर्तव्य के प्रति समर्पण, जवाबदेही और पारदर्शिता तथा रेलवे सेवा (आचरण) बनाए रखने में भी विफल माना है।
ट्रांसफर पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ी बात ट्रांसफर को लेकर सामने आ रही है। उल्लेखनीय है कि किसी कर्मचारी के ट्रांसफर के लिए विजिलेंस क्लियरेंस जरूरी होती है। विजिलेंस क्लियरेंस के बिना किसी कर्मचारी का ट्रांसफर संभव नहीं है। लेकिन इस मामले में विजिलेंस केस होते हुए भी बृजराज का आसानी से ट्रांसफर हो गया। हालांकि वर्कशॉप अधिकारियों का दावा है कि ब्रजराज की विजिलेंस क्लीयरेंस है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि विजिलेंस के सोते हुए भी ब्रजराज को विजिलेंस क्लीयरेंस किसने दे दी। ऐसे में यह बात भी सामने आ रही है कि बृजराज का ट्रांसफर पहले हो गया विजिलेंस ने बाद में मामला दर्ज किया। हालांकि यह बात कई लोगों के गले नहीं उतर रही। क्योंकि बृजराज का यह मामला 2022 का है और उसका ट्रांसफर कुछ महीने पहले ही हुआ है।
विजिलेंस क्लीयरेंस के बाद लिया ब्रजराज को
फाइल में विजिलेंस क्लीयरेंस के बाद ही ब्रजराज को वर्कशॉप में लिया गया है। अब ब्रजराज के खिलाफ विजिलेंस जांच की बात सामने आ रही है। – सुधीर सरवरिया, मुख्य कारखाना प्रबंधक






