Wednesday, September 30, 2026
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राम शर्मा ‘कापरेन’ के द्वारा लिखित ‘जलन से जलतरंग’ का हुआ  लोक-मोचन और मंचन

कोटा/मदर टेरेसा शिक्षण संस्थान में कवि लेखक और अभिनेता राम शर्मा ‘कापरेन’ के द्वारा लिखित *जलन से जल तरंग* पुस्तक का विमोचन हुआ। विमोचन के तुरंत बाद इसी पुस्तक के एक शीर्षक रंगम् ‘जलन से जल तरंग’ का मंचन भी हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में रूपनारायण शर्मा ‘संजय’ के द्वारा स्वस्तिवाचन किया। उसके बाद रंगगीतिका की अध्यक्ष और शिक्षाविद श्रीमती स्नेहलता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि रंगमंच एक ऐसा स्थान है जहां जीवन के सभी अंग दिखेंगे।

कार्यक्रम में पधारे पांचो अतिथियों को पांच तत्वों के रूप में पदासीन होकर माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की। पांच अतिथियों में उदक पद स्वरूप श्री गिरवर ‘गिरी’ वरिष्ठ साहित्यकार, तारापथ पद स्वरूप श्री अतुल चतुर्वेदी, वरिष्ठ व्यंग्यकार और शिक्षाविद, जातवेद पद स्वरूप डॉ,दीपक श्रीवास्तव संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष, समीरण पद स्वरूप योगेंद्र शर्मा, साहित्यकार और शिक्षाविद और मेदिनी पद स्वरूप में श्री ब्रजराज गौतम, ज्योतिषविज्ञ व वरिष्ठ अभिनेता सुशोभित थे। अतिथियों के द्वारा पुस्तक ‘जलन से जलतरंग’ विमोचित करने के बाद रंगम् ‘जलन से जल तरंग’ का मंचन प्रारंभ हुआ। ‘जलन से जलतरंग, रंगम् का विषय है कि बढ़ती हुई लड़कियाँ अपने पिता से अपनी गतिविधियों को छुपा लेती है और कुछ लोगों को इससे मौका मिलता है और ये इनको ब्लैकमेल करते हुए परेशान करने लग जाते हैं। इसका अंत कितना बुरा हो सकता है हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते। अपनी गतिविधियों को पिता से छुपा कर रखना एसिड अटैक तक भी पहुंचा सकता है। संदेश यह है कि किशोरावस्था में मौजूद बच्चों और अभिभावकों के बीच में बातचीत करने का खुला वातावरण होना चाहिए।

इस कार्यक्रम को सतर्कता के साथ संचालित  विजय जोशी, वरिष्ठ साहित्यकार ने किया। इस रंग में अभिनय करने वाले कलाकार थे – लावण्या जोशी,

इंदु गौतम, हिमानी शर्मा, मधु जैन, सुमंत भाटी, नहुष व्यास, वैदेही शर्मा, हिया व्यास, रियांशी व्यास , राम शर्मा’काप्रेन। प्रकाश व्यवस्था में  अनु सिंह धाकड़ ‘धांसू ‘, संगीत व्यवस्था में  मंत्र दाधीच, मेकअप व्यवस्था में फ़िज़ा हयात, मंचीय सहयोग व्यवस्था में  रूपनारायण शर्मा संजय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मंचन के बाद उद्बोधन करते हुए उदक पद स्वरूप  डॉक्टर गिरवर ने कहा कि इस रंगम के मंचन के दौरान जो प्राण तत्व था जीवंत अभिनय। बड़े-बड़े मंचों पर ऐसे प्रस्तुति नहीं देखी।

तारा पाठ पद पर सुशोभित अतुल चतुर्वेदी जी ने कहा कि पुस्तक अपने आप में रंगम् की दुनिया में महत्व पूर्ण स्थान रखती है। पुस्तक के तीनों रंगम समाज के आईने को दिखाते हैं।मेदिनी पद पर आसीन बृजराज गौतम ने कहा कि अभिनय करने वाली लावण्या और पिता के बीच में संबंध ऐसे ही थे जैसे श्री कृष्णा और अर्जुन के बीच में थे।  समीरान पद पर सुशोभित योगेंद्र शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से हवा हमारे अस्तित्व का आधार होती है वैसे ही किसी भी रंगम् के अस्तित्व का आधार होते हैं उसके भाव।

जातवेद पद पर आसीन डॉक्टर दीपक श्रीवास्तव ने पुरजोर आवाज में कहा कि जिस प्रकार से अग्नि तत्व सभी तत्वों को परिपक्व अवस्था में पहुंच आती है वैसे ही समस्त भावों को एक मंच पर देखकर व्यक्ति की आत्मा पवित्र और पाक भी होती है। दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि राम शर्मा ‘कापरेन’ रंगमंच की अलख जगा बैठे हैं जो निश्चित ही एक दिन नैराश्य में आशा का सूत्रपात करेगी।

कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ साहित्यकार जैसे मुकुट ‘मणिराज’, जितेंद्र ‘निर्मोही’,  प्रेम शास्त्री,  हेमराज सिंह ‘हेम’,  नंद सिंह,  राजेंद्र पवार, तंवर सिंह ‘तारज’, जोधराज ‘मधुकर’  बंटी सुमन,  गोरस प्रचंड,  कृष्णा महावर,  महेन्द्र ‘नेह’,  रवीन्द्र बीकावत और रंगकर्मी  दयानन्द सप्रे, रंगलाल मेहरा,  शरीफ नादान,  संदीप राय,  शरद गुप्ता,  विजय मैथूल,  नरेंद्र जैन , हेमराज कच्छावा,  कपिल गौतम  केदार लाल शर्मा रिटायर्ड व्याख्याता, श्रीमती शालिनी गौतम, पार्षद आदि उपस्थित थे।    कार्यक्रम के अंत में राम शर्मा ‘काप्रेन’ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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