कोटा। कोटा के एक लोको पायलट को 7 महीने में 9 चार्ज शीट (आरोप-पत्र) थमाने और हरेसमेंट करने का मामला सामने आया है। लोको पायलट ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, रेलवे बोर्ड, पश्चिम-मध्य रेलवे महाप्रबंधक, मुख्य इलेक्ट्रिक इंजीनियर, डीआरएम, एडीआरएम, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता, एसटी-एससी तथा मानवाधिकार आयोग आदि को की है। इसके बाद पश्चिम-मध्य रेलवे ने इसकी जांच शुरू की है।
जांच के लिए कोटा पहुंची जबलपुर मुख्यालय टीम ने बुधवार को लोको पायलट और गार्ड-ड्राइवर लॉबी सुपरवाइजर संतोष शर्मा और केपी सिंह के बयान दर्ज किए। लोको निरीक्षक तेजपाल मीणा से भी पूछताछ की जानकारी सामने आ रही है। पूछताछ के लिए लोको पायलट को तुरंत प्रभाव से सागर से बिना ड्यूटी करे कोटा बुलाया गया था।
आज और कल भी पूछताछ
मामले को लेकर गुरुवार को भी पूछताछ हो सकती है। यह पूछताछ दिल्ली एसटी-एससी आयोग द्वारा की जाएगी। इसके अलावा गुरुवार को भी एक अन्य एजेंसी द्वारा मामले की जांच की जाएगी।
एक ही गलती की अलग-अलग सजा
वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (टीआरओ) विभाग में एक ही गलती पर लोको पायलटो को अलग-अलग सजा देने का भी मामला सामने आया है।
अलनिया में लाल सिग्नल पार करने के मामले में एक लोको पायलटो को वॉलंटरी रिटायरमेंट दे दिया गया। जबकि ऐसे ही एक मामले में एक लोको पायलटो के 3 साल के इंक्रीमेंट बंद कर नीचे बॉटम पर ले आए। इसी तरह सवाई माधोपुर में लाल सिग्नल पार करने पर एक लोको पायलट को डीआरएम ऑफिस में कार्यालय अधीक्षक बना दिया। ऐसे ही एक तीसरे मामले में शामगढ़ में चीफ टेक्नीशियन (एमसीएफ) बना दिया।
शराब के मामलों में भी गड़बड़ी
इसी तरह शराब पीकर ड्यूटी पहुंचने वाले लोको पायलटो को सजा देने के मामलों में भी गड़बड़ी सामने आई है। शराब के नशे में ड्यूटी पर पहुंचे एक लोको पायलटो को 4200 ग्रेड से 2400 पे ग्रेड पर कर दिया। साथ ही 3 साल के एग्रीमेंट बंद कर दिए। जबकि ऐसे ही एक मामले में दूसरे लोको पायलटो की 4200 पे ग्रेड बरकरार रखी।
9 मामले आए सामने
एक ही गलती पर अलग-अलग सजा के करीब 9 मामले सामने आए हैं। यह सभी मामले पिछले 1 से 2 साल के बीच सामने आए हैं। उस समय कोटा मंडल में वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (टीआरओ) पद पर गौरव श्रीवास्तव थे। यह सभी मामले गौरव के कार्यकाल में ही सामने आए हैं। पिछले दिनों ही कोटा से गौरव का ट्रांसफर हुआ है।
अधिकारियों से भी पूछताछ
सूत्रों ने बताया की जरूरत पड़ी तो मामले में अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। अधिकारियों द्वारा ही यह चार्ज शीटें जारी की गई हैं। ऐसे में यह संभव नहीं है कि अधिकारियों को मामले में कुछ पता नहीं हो।
सूत्रों ने एक ही गलती पर अलग-अलग सजा के मामलों पर मिली भगत की आशंका जताई है। निष्पक्ष जांच से ही इस पूरे मामले का खुलासा संभव है।





