Monday, June 22, 2026
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ये भ्रष्टाचार है,ना रूकेगा, ना झुकेगा -सवा महीने में दूसरा वसूली एएसपी दबोचा

*ये भ्रष्टाचार है,ना रूकेगा, ना झुकेगा*

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*एसीबी के अधिकारी ही भ्रष्टाचार की आग में पेट्रोल छिड़क रहे हैं,सवा महीने में दूसरा वसूली एएसपी दबोचा*

———————————–       ना ये साला झुकेगा और ना ही रूकेगा। राजस्थान में ना इसे अशोक गहलोत झुका सके और ना ही अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रोक पा रहे हैं। सरकार चाहे डबल इंजन की हो या ट्रिपल इंजन की,इसकी रफ्तार इनसे ज्यादा है। यह पहले भी चल रहा था और अब भी दौड़ रहा है या कहिए पूरी तेजी से चल रहा है। कोई कितनी भी ताकत लगा ले। दावे कर ले। वादे कर ले। लेकिन सिस्टम से इसे बाहर निकालना मुश्किल ही नहीं,अब तो नामुमकिन है। इसकी ताकत में इतना इजाफा हो गया है कि,जिन्हें इसे रोकने और पकड़ने की जिम्मेदारी दी थी,वो ही इसकी गुलामी कर रहे ह़ै। नहीं,मैं किसी आदमी की बात नहीं कर रहा। क्योंकि आदमी चाहे आम हो खास। उसे कभी ना कभी रूकना पड़ता है और कभी मजबूरी,स्वार्थ, लालच या डर के मारे झुकना भी पडता है। ये भष्ट्राचार और भष्ट्र अफसरों और कर्मचारियों की बात है। राजस्थान में जीरो टालरेंस करप्शन की सरकार देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री और ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार भी भ्रष्टाचार नहीं रोक पा रही है।

लेकिन अब लोगों की समझ में ये अच्छी तरह से आ गया कि भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है? क्यों राजस्थान में हर विभाग में भ्रष्टाचार की बात होती है ? क्यों यह धारणा बन गई है कि किसी भी पार्टी की सरकार हो,बिना कुछ दिए काम नहीं होगा। जाहिर है जब करप्शन यानि भ्रष्टाचार को रोकने वाले एंटी करप्शन विभाग के बड़े अधिकारी ही करप्ट और वसूलीखोर है जाएंगे,तो भ्रष्टाचार मिटेगा भी कैसे? आग तो पानी डालने से ही बुझेगी। पेट्रोल तो आग को और भड़काएगा ही। जब भष्टाचार और रिश्वत की आग में एंटी करप्शन विभाग पानी की जगह पेट्रोल बनेगा,तो फिर ये तो और फैलेगी ही।

पिछले महीने एंटी करप्शन ब्यूरो के एएसपी सुरेंद्र कुमार शर्मा को वसूली करते दबोचा था और 27 जून को एक और एडिशनल एसपी जगराम मीणा को ट्रैप किया। उसकी कार और घर से 50 लाख नगद,करोड़ों के प्लाट के कागज मिले। शर्मा और मीणा दोनों में कई समानताएं हैं। दोनों सरकारी विभागों के अफसरों को ड़रा धमकाकर मंथली वसूली करते थे। दोनों के लिए वसूली करने वाले दलाल थे। दोनों ही शराब के शौकीन थे। शर्मा रिश्वत में महंगी शराब मंगाया करते थे,तो मीणा के तो घर में ही मिनी बार मिला है। दोनों अपने-अपने तबादले के बाद माल समेटकर जयपुर आ रहे थे। शर्मा तो फिल्मों की तरह वसूली के लिए अपना गिरोह चला रहे थे। बाकायदा विभागवार दलाल बना रखे थे। उन पर हैड दलाल भी था। जो अधिकारी-कर्मचारी पैसा नहीं देता था, उसे खुद फोन कर सर्जिकल स्ट्राइक की यानी रेड- गिरफ्तारी की धमकी देते थे। हो सकता है मीणा भी इसी तर्ज पर वसूली कर रहे हो। ये तो जांच से ही पता चलेगा।

जब एसीबी के अधिकारी खनन, परिवहन, पुलिस,वन,राजस्व जैसे विभागों के अधिकारियों को धमकाकर वसूली करते हैं,तो जाहिर है कि इन विभागों के अधिकारी खुद के लिए और फिर एसीबी के अधिकारियों को देने के लिए कितने बड़े पैमाने पर करप्शन करते होंगे। फिर भ्रष्ट विभागीय अधिकारों को पालने-पोसने और मनपसंद पोस्टिंग दिलाने ,तबादले रूकवाने के लिए नेता भी तो है। उन्हें भी तो पैसा पहुंचाना पड़ता होगा। लोगों को सरकारी करप्शन से बचाने वाला विभाग खुद ही करप्शन में लग जाए,तो जनता का तो फिर भगवान ही मालिक है। अभी तो शर्मा और मीणा ही हत्थे चढ़े हैं। ना जाने ऐसे कितने और अधिकारी विभाग में रहकर माल कमा रहे होंगे।

सवाल ये भी है कि क्या अधीनस्थ अधिकारियों के करप्शन की जानकारी उनके वरिष्ठ अधिकारियों जैसे एसपी,डीआईजी, आईजी आदि अधिकारियों तो नहीं होती या फिर वह भी हिस्सेदार होते हैं। अगर पुलिस का खुफिया तंत्र अपने ही भ्रष्ट अधिकारियों को नई खोज पाता है, तो फिर वह जनता की सुरक्षा कैसे करेगा?।ऐसा नहीं है कि एंटी करप्शन ब्यूरो के सभी अधिकारी भ्रष्ट हैं। आखिर इन भ्रष्टाचारियों को पकड़ा भी तो एसीबी के दूसरे अधिकारियों ने ही है। लेकिन जिस तरह एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है, उसी तरह शर्मा-मीणा जैसे अधिकारी पूरे महकमे की बदनामी करते हैं।

एक बात और भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी किसी एक सरकार में नहीं होती। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। किसी सरकार में कम,तो किसी में ज्यादा जरूर हो सकती है। सीएम भजनलाल शर्मा अगर वाकई भ्रष्टाचार मुक्त राजस्थान बनाना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले एसीबी को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना होगा। उसके बाद परिवहन, खनन, पुलिस, राजस्व जैसे कमाऊ महकमों पर निरंतर निगाह बनाए रखनी होगी। क्योंकि करप्शन का अंतिम शिकार आम जनता होती है। जिससे ही यह राशि वसूली जाती है। और सरकार उसी की हितैषी होने का दावा करती है।

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