Wednesday, February 25, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

विराट रूप दर्शन…- कालीचरण राजपूत

विराट रूप दर्शन…..

 

हमें बताओ हे प्रभू ! हो उग्र रूप में कौन ?

आप स्वयं बतलाइए, मैं रहता हूं मौन ।।

अर्जुन को बताओ यह, प्रभू आपका तत्व ।

अनेकों नमस्कार हैं, अब तो बताओ सत्व ।।

मेरी तो यह वीनती, आप समझे शंका ।

पितरों की कुरु भूमि में, अर्जुन वीर है बंका।।

उग्र रूप है आपका, आप देवों में से कौन?

प्रभू मैं नहिं जानता, नहिं जानें वे द्रोण।।

नहीं समझ में आ रहा, अब क्या होगा पार्थ।

जानें कैसे रूप को, अब तुम्हीं बताओ सार्थ ।।

समझ नहीं कुछ आ रहा, नमन करो स्वीकार ।

तरह-तरह के रूप क्यों ? किए हैं अंगीकार ।।

भयंकर ऐसे रूप में, प्रकट हुए क्यों आप ?

कौरव जन या गैर को, निगल रहे क्यों आप ?

साफ बताएं हमें प्रभु, क्यों प्रविष्ट हो रहे वीर?

योद्धा मुख में जा रहे, मन हो रहे अधीर । ।

 

के. सी. राजपूत, कोटा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles