ग़ज़ल
शकूर अनवर
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दुनिया में अब प्यार कहाँ।
सपनों का संसार कहाँ।।
नज़रों की तलवार कहाँ।
अब वो दिल पर वार कहाँ।।
मज़लूमों* की बस्ती में।
तुम आये सरकार कहाँ।।
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तूफ़ानों में घिर आये।
ले आई मॅंजधार कहाँ।।
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काग़ज़ी नावें डूबेंगी।
है इनमें पतवार कहाँ।।
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अपने जुनूँ* में डूबे हैं।
दीवाने हुशियार कहाँ।।
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हर दिन मेहनत मज़दूरी।
अपने लिए इतवार कहाँ।।
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दिल तो दुखों का सागर है।
इसका “अनवर” पार कहाँ।।
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शकूर अनवर
मज़लूमों*पीड़ितों
जुनूँ*दीवानगी,जोश
9460851271
ग़ज़ल -शकूर अनवर





