श्रीवत्स ( लक्ष्मीजी का प्रिय यंत्र)
श्रीवत्स पुरा प्रतीक है, शुभ हम सबका सेतु ।
फल प्रतीक श्री वत्स है, लक्ष्मी जी के हेतु ।।
पद्मा प्रिय श्री वत्स है, श्री विष्णु जी के वक्ष ।
सौभागशाली चिन्ह यह, सेवक रक्षा में दक्ष ।।
श्री जनार्दन का वक्ष ही, इस शुभ का स्थान ।
नारायण के भक्त सब, देते इसको मान ।
हृदय तो श्री विष्णु का, लक्ष्मी जी का निवास ।
वही इसका निवास है, यंत्र श्री वत्स खास ।।
श्री का तात्पर्य लक्ष्मी, उनका प्रिय श्रीवत्स ।
कमला जी ही खोलती, इस यंत्र का रहस्य ।।
जन सुभता से जोड़ने, सुंदरता का प्रतीक ।
संपन्नता से जोड़ना, ऐसा रिश्ता ठीक ।।
कल्कि देव धारण करें, श्री वत्सी उपहार ।
दसवें “अवतार रूप में, पाएं प्यार अपार ।।
विष्णु के दसवें जन्म में, कल्कि रूप अवतार ।
समय-समय पर आगमन, श्री प्रभु का व्यापार ।।
कला और संस्कृति का, महत्वपूर्ण प्रतीक ।
समृद्धि का चिन्ह यह, सुंदर और सटीक ।।
पहला ऐसा चिन्ह यह, है लक्ष्मी जी को प्यारा।
वैष्णवों का पूज्य भी, सारे जग में न्यारा ।
सारे जग में न्यारा …..
के. सी. राजपूत, कोटा।
श्रीवत्स ( लक्ष्मीजी का प्रिय यंत्र)- कालीचरण राजपूत






